नयी दिल्ली, दो नवंबर (भाषा) विदेश सचिव विक्रम मिसरी अगले महीने की शुरुआत में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की संभावित भारत यात्रा की तैयारियों के सिलसिले में बुधवार से नेपाल की दो दिवसीय यात्रा पर जाएंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि मिसरी आपसी हितों से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए पड़ोसी देश की यात्रा करेंगे।
इस संबंधी मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि विदेश सचिव की यात्रा का उद्देश्य नेपाल के प्रधानमंत्री की प्रस्तावित भारत यात्रा की तैयारियां करना है।
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत और नेपाल के बीच मजबूत एवं मैत्रीपूर्ण संबंध हैं और दोनों देशों ने सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।’’
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘विदेश सचिव की आगामी यात्रा दोनों देशों के बीच नियमित रूप से उच्चस्तरीय यात्राओं और बैठकों की परंपरा का हिस्सा है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।’’
नेपाल क्षेत्र में भारत के व्यापक रणनीतिक हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के नेताओं ने अक्सर भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के संबंधों का उल्लेख किया है।
चारों ओर से जमीन से घिरा नेपाल वस्तुओं और सेवाओं के परिवहन के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर है। समुद्र तक पहुंचने के लिए भी उसे भारत से होकर गुजरना पड़ता है। नेपाल अपनी जरूरत का अधिकतर सामान भारत से आयात करता है या भारत के रास्ते मंगाता है।
मई में शाह के उस बयान के बाद दोनों देशों के संबंधों में कुछ तनाव पैदा हो गया था, जिसमें उन्होंने भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद को सुलझाने के लिए चीन और ब्रिटेन को शामिल करने की बात कही थी।
भारत ने नेपाल के साथ सीमा विवाद सुलझाने में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था। नयी दिल्ली ने कहा था कि सीमा से जुड़े सभी मुद्दों के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच पहले से एक द्विपक्षीय व्यवस्था मौजूद है।
भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। भारत लगातार कहता रहा है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं।
भाषा सिम्मी माधव
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