नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे ‘अनावश्यक रूप से गर्भाशय निकालने’ के मामलों पर रोक लगाने के लिये केंद्र द्वारा तैयार किए गए दिशानिर्देशों को तीन महीने के अंदर लागू करें।
यह देखा गया है कि विभिन्न स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत सरकार से बीमे की मोटी रकम प्राप्त करने के लिये कई बार गरीब महिलाओं का गर्भाशय अनावश्यक रूप से ऑपरेशन कर निकाल दिया जाता है।
मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की पीठ ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलों पर गौर करने के बाद इस मुद्दे पर एक जनहित याचिका का निस्तारण किया।
विधि अधिकारी ने कहा कि समस्या से निपटने के लिए कार्य योजना में राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर एक निगरानी समिति के गठन और एक शिकायत पोर्टल की शुरुआत के सुझाव शामिल हैं।
पीठ ने कहा, “चूंकि अब केंद्र सरकार द्वारा दिशानिर्देश तैयार करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा चुके हैं…, हमें याचिका को कायम रखने का कोई औचित्य नजर नहीं आता। केंद्र सरकार अब दिशानिर्देश के अनुरूप आवश्यक कदम उठाएगी।”
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