scorecardresearch
Monday, 12 October, 2026
होमदेशयौन उत्पीड़न के आरोपों में JNU से बर्खास्तगी के बाद कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम के खिलाफ FIR दर्ज

यौन उत्पीड़न के आरोपों में JNU से बर्खास्तगी के बाद कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम के खिलाफ FIR दर्ज

JNU की शिकायत पर वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई. अकोइजम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह BJP के राजनीतिक 'विच हंट' (राजनीतिक प्रतिशोध) का शिकार हुए हैं.

Text Size:

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस सांसद प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ FIR दर्ज की है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद कुछ दिन पहले ही उन्हें शिक्षक के पद से हटा दिया था.

कांग्रेस के इनर मणिपुर से सांसद अकोइजम के खिलाफ रविवार को वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई. यह FIR JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (CSO) की शिकायत और उनके दिए गए दस्तावेजों के आधार पर दर्ज की गई.

इसके दो दिन पहले विश्वविद्यालय ने अकोइजम को नौकरी से हटा दिया था. उनके खिलाफ यौन दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच करने वाली आंतरिक समिति ने उन्हें कड़ी सजा देने की सिफारिश की थी.

हालांकि, रविवार को दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में अकोइजम ने आरोपों से इनकार किया. उन्होंने JNU से हटाए जाने को राजनीतिक “बदले की कार्रवाई” बताया. उन्होंने BJP पर आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उनकी आवाज दबाने के लिए उनके खिलाफ झूठे आरोप गढ़े जा रहे हैं.

FIR में क्या कहा गया है

FIR के मुताबिक, JNU की आंतरिक जांच के बाद आंतरिक समिति (IC) के सदस्यों की ओर से दर्ज किए गए आकलन और टिप्पणियां पुलिस को भेजी गईं.

पुलिस को दी गई शिकायत में JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि संबंधित दस्तावेजों को देखने पर पता चला कि आंतरिक समिति ने अलग-अलग शिकायतकर्ताओं और पीड़ितों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की थी. समिति ने इस मामले में अपनी जांच के नतीजे, आकलन और टिप्पणियां दर्ज की थीं.

FIR में कहा गया है, “JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ सोशल सिस्टम्स में प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ लगे आरोपों की आंतरिक समिति ने जांच की. गवाहों, बचाव पक्ष के गवाहों और सामने आए दूसरे सबूतों का आकलन करने के बाद समिति ने अपने निष्कर्ष दर्ज किए.”

FIR में आगे कहा गया है कि समिति का मानना है कि जिस घटना के बाद जांच शुरू हुई थी, वह कोई अकेली घटना नहीं थी.

इसमें कहा गया, “आरोपी के अपने बयान, गवाहों के बयानों और स्वतंत्र सबूतों को एक साथ देखने पर अनुचित निजी बातचीत, यौन इशारे करने वाले व्यवहार और बिना सहमति के शारीरिक संपर्क का बार-बार दोहराया गया तरीका सामने आता है. इसके अलावा, महिला छात्रों के साथ बातचीत में पेशेवर सीमाओं का ठीक से पालन नहीं किया गया. इससे पढ़ाई का माहौल डराने वाला, अपमानजनक और दुश्मनी भरा बन गया.”

FIR में 22 जनवरी 2025 के HCL टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड बनाम एन. पार्थसारथी मामले में दिए गए फैसले का भी जिक्र किया गया है. इसमें कहा गया है कि किसी व्यवहार का यौन उत्पीड़न होना इस बात से तय होता है कि वह शिकायतकर्ता की इच्छा के खिलाफ था या नहीं और उस पर उसका क्या असर पड़ा. आरोपी की मंशा चाहे जो भी बताई गई हो, उससे यह बात नहीं बदलती.

FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 लगाई गई हैं.

धारा 75, 75(1)(i) और 75(1)(iv) के तहत बिना सहमति के शारीरिक संपर्क, यौन संबंध बनाने की कोशिश या यौन इशारों वाली टिप्पणियों से जुड़े यौन उत्पीड़न के लिए सजा का प्रावधान है. वहीं, धारा 79 के तहत किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने या उसकी निजता में दखल देने के इरादे से किए गए शब्दों, इशारों या कामों के लिए सजा का प्रावधान है.

इस बीच, JNU शिक्षक संघ (JNUTA) ने रविवार को एक बयान जारी कर विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रक्रिया में हुई चूकों पर सवाल उठाए. संघ ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर को नौकरी से हटाने का फैसला संस्थान के नियमों का उल्लंघन करता है.

JNUTA ने JNU अधिनियम के नियम 30 का हवाला देते हुए कहा कि कुलपति कार्यकारी परिषद की स्पष्ट मंजूरी के बिना अकेले किसी शिक्षक को नौकरी से हटाने का आदेश नहीं दे सकते.

संघ ने यह भी कहा कि आदेश जारी करने से पहले कार्यकारी परिषद की कोई बैठक नहीं बुलाई गई थी और न ही संबंधित दस्तावेज सदस्यों को बांटे गए थे.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: दिल्ली का कचरा संकट क्यों नहीं हो रहा खत्म? 13,500 टन कचरा, 8,000 टन की ही प्रोसेसिंग क्षमता


 

share & View comments