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Friday, 1 May, 2026
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‘दुखद घटना’ की आशंका से अदालत में पेशी के दौरान आरोपी को बेल्ट, जूते पहनने की इजाजत नहीं

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मुंबई, 19 जुलाई (भाषा) मुंबई की एक विशेष अदालत ने पेशी के दौरान एक आरोपी व्यक्ति को जूते और बेल्ट पहनने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, क्योंकि जेल अधिकारियों का मानना है कि इससे “दुखद घटनाएं” हो सकती हैं।

न्यायाधीश बी डी शेल्के ने भी (जेल अधिकारियों के) इस तर्क से सहमति जताई है कि जूतों का इस्तेमाल जेल के अंदर अवैध वस्तुओं की तस्करी के लिए किया जा सकता है।

महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की विशेष अदालत ने सोमवार को अजय करोस की एक याचिका खारिज कर दी, जो पिछले छह साल से यहां के पास तलोजा जेल में बंद है। विस्तृत आदेश मंगलवार को उपलब्ध कराया गया।

आरोपी ने अपनी अर्जी में कहा है कि उसे पैर में तेज दर्द हो रहा है, जिसके कारण वह अदालत की सुनवाई में शामिल होने के दौरान चप्पल या किसी अन्य प्रकार के खुले जूते नहीं पहन सकता।

उसने अदालत में पेश होने के दौरान बेल्ट और जूते पहनने की अनुमति मांगी, लेकिन तलोजा केंद्रीय कारागार के अतिरिक्त अधीक्षक ने अपने जवाब में कहा कि जेल नियमावली ऐसी रियायतों का प्रावधान नहीं करती है।

जवाब में कहा गया है, “यदि बेल्ट की अनुमति दी जाती है, तो इस तरह बेल्ट का इस्तेमाल करके अन्य विचाराधीन कैदियों पर (याचिकाकर्ता द्वारा) हमले की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। यहां तक ​​कि जेल के अंदर किसी अप्रिय घटना की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।’’

अधिकारी ने कहा कि इसी तरह, कैदियों को जूते पहनने की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है और जूतों में छुपाकर जेल के अंदर ‘‘अवैध और अनधिकृत सामान’’ लाये जाने के मामले सामने आए हैं।

अदालत ने माना कि जेल अधीक्षक के जवाब में दम है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘…अगर इस तरह की सामग्रियों की अनुमति प्रदान की जाती है तो जेल के अंदर दुखद घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है।’’

भाषा सुरेश रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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