जम्मू, 20 अक्टूबर (भाषा) नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया और आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने एक खास राजनीतिक पार्टी को चुनाव जिताने में मदद करने के लिए काम किया है।
अब्दुल्ला से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के इस बयान के बारे में सवाल पूछा गया था कि सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से किए जाने वाले आंदोलन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं करते, ऐसे आंदोलन राजनीतिक हितों का साधन बन सकते हैं और समाधान देने के बजाय समाज में विभाजन बढ़ा सकते हैं।
अब्दुल्ला ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और संविधान के तहत आपको विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, बशर्ते वे शांतिपूर्ण रहें। इसलिए अभी यह विरोध प्रदर्शन हो रहा है।’
मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पूरा देश जानता है कि निर्वाचन आयोग ने अनियमितताएं की हैं।
अब्दुल्ला ने आरोप लगाया, ‘उसने (आयोग ने) एक राजनीतिक पार्टी को चुनाव जिताने में मदद करने के लिए काम किया, जबकि उसे ऐसा करना नहीं था।’
निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष ने कहा कि चयन प्रक्रिया से भारत के प्रधान न्यायाधीश को बाहर रखने और समिति में सरकार के दो प्रतिनिधियों की मौजूदगी से मौजूदा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा, ‘चयन समिति के तीन सदस्यों में से दो सरकार के हैं और एक विपक्ष का है। इसलिए इस व्यवस्था में बदलाव करना जरूरी है।’
अब्दुल्ला ने कहा कि निर्वाचन आयोग स्वतंत्र होना चाहिए और उसे अपनी जिम्मेदारियां स्वतंत्र रूप से निभाने में सक्षम होना चाहिए।
डॉ. अब्दुल्ला ने यहां परेड मैदान में दशहरा समारोह में भी हिस्सा लिया।
भाषा जोहेब सुरेश
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