नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को ओमान से पुष्टि मिली है कि वह महादेव ऑनलाइन बुक के फरार प्रमोटरों में से एक और करोड़ों रुपये के कथित अवैध सट्टेबाजी गिरोह के मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर के खिलाफ एजेंसी की ओर से दर्ज दो मामलों में मुकदमा चला सकती है. दिप्रिंट को यह जानकारी मिली है.
चंद्राकर सीबीआई के दो मामलों और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में वांछित था. रविवार शाम को सीबीआई की एक टीम उसे ओमान से भारत लेकर आई, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया. एजेंसी ने सोमवार को उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा के सामने पेश किया. सीबीआई ने उसे रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश करने के लिए दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मांगी. महादेव ऑनलाइन से जुड़ा मामला इसी अदालत में चल रहा है.
हालांकि, चंद्राकर के वकील तुषार गिरी ने उसकी गिरफ्तारी को चुनौती दी. उन्होंने दलील दी कि प्रत्यर्पण का आदेश भारत सरकार की ओर से दिए गए इस भरोसे पर आधारित था कि उनके मुवक्किल पर ओमान में जारी आदेश के मुताबिक ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के अलावा किसी दूसरे मामले में मुकदमा नहीं चलाया जाएगा.
गिरी ने दलील दी, “ओमान की अदालत के प्रत्यर्पण आदेश में सीबीआई के मामले का कोई जिक्र नहीं है.” उन्होंने अपने मुवक्किल को गिरफ्तार करने के सीबीआई के अधिकार पर सवाल उठाया.
उन्होंने अदालत से कहा, “मैं सिर्फ गिरफ्तारी की कानूनी वैधता पर सवाल उठा रहा हूं… ईडी के गिरफ्तारी के अधिकार पर सवाल नहीं उठा रहा. मैं यह नहीं कह रहा कि ईडी उसे हिरासत में नहीं ले सकती, लेकिन जब सीबीआई के प्रत्यर्पण अनुरोध पर अदालत की ओर से कोई आदेश नहीं दिया गया, तो उसका उसे हिरासत में लेना कानून के खिलाफ है.”
हालांकि, सुनवाई के कुछ घंटे बाद ही सीबीआई को ओमान के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (एनसीबी) से पुष्टि मिल गई कि चंद्राकर का प्रत्यर्पण सिर्फ ईडी के अनुरोध तक सीमित नहीं था.
ओमान के एनसीबी ने सीबीआई के सवाल के जवाब में लिखा, “हम पुष्टि करना चाहते हैं कि ओमान की न्यायपालिका ने आपके अधिकारियों की ओर से भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोधों के आधार पर संबंधित व्यक्ति को आपके देश भेजने की मंजूरी दी है. आपने पूछा है कि क्या प्रत्यर्पण में उसके खिलाफ दर्ज मामले भी शामिल हैं. हम पुष्टि करते हैं कि उसका प्रत्यर्पण इन मामलों को भी शामिल करता है और भारत में उस पर नीचे दिए गए मामलों के लिए भेजे गए अनुरोधों में बताए गए अपराधों के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है.”
इस जवाब में 18 और 19 दिसंबर 2024 को दर्ज सीबीआई के दोनों मामलों और अक्टूबर 2022 में शुरू किए गए ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले का जिक्र किया गया था.
ओमान के एनसीबी ने अपने भारतीय समकक्ष को आगे बताया, “यह ओमान सल्तनत के भीतर सभी कानूनी शर्तें पूरी होने, प्रक्रियाएं पूरी होने और उसके खिलाफ संबंधित स्थानीय न्यायिक फैसलों को लागू किए जाने के बाद किया गया है.”
सीबीआई ने इस पत्र की एक कॉपी रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में जमा की. बुधवार को अदालत ने चंद्राकर को आठ दिन तक सीबीआई की हिरासत में रखने की मंजूरी दे दी. अदालत ने कथित सट्टेबाजी के कारोबार के मामले में पूछताछ के लिए उसे हिरासत में लेने की सीबीआई की मांग मान ली. अनुमान है कि इस कारोबार से 75,000 करोड़ रुपये तक की अपराध से कमाई हुई थी.
खास बात यह है कि गिरी की आपत्तियों के बावजूद दिल्ली की अदालत ने चंद्राकर की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर ली थी. अदालत ने कहा था कि वह इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकती कि ईडी के मामले की कार्रवाई उस मूल अपराध से जुड़ी है, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है.
इस मामले पर दिप्रिंट ने जब गिरी से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने अपनी दलील दोहराई. उन्होंने कहा, “सीबीआई की ओर से पेश किया गया पत्र दोनों देशों की दो एजेंसियों के बीच का है, यह कोई बाध्यकारी न्यायिक आदेश नहीं है.”
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