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Thursday, 5 November, 2026
होमदेश‘पत्नी की तबीयत खराब थी, फिर भी पुलिस घसीटकर ले गई’—अंकिता भंडारी के पिता का आरोप

‘पत्नी की तबीयत खराब थी, फिर भी पुलिस घसीटकर ले गई’—अंकिता भंडारी के पिता का आरोप

पुलिस का कहना है कि बीएनएसएस की धारा 163 लागू होने के कारण अंकिता के माता-पिता को राजघाट और उसके आसपास के इलाकों से हटाया गया. पिता का आरोप है कि पुलिस उनकी लोकेशन पर नजर रख रही है.

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नई दिल्ली: साल 2022 में ऋषिकेश के एक रिजॉर्ट में काम करने वाली 19 साल की अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी. बुधवार देर रात उनके माता-पिता को राजघाट से हिरासत में ले लिया गया. उन्होंने बताया कि कम से कम चार पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेर लिया, घसीटकर वहां से ले गए और जबरन पुलिस की गाड़ी में बैठा दिया.

अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने कहा, “मेरी पत्नी को कमजोरी और चक्कर आ रहे थे. इसलिए हम बस कुछ देर बैठने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस हमें घसीटकर वहां से ले जाने लगी. एक महिला पुलिसकर्मी ने कहा कि मेरी पत्नी नाटक कर रही है.”

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) की धारा 163 राजघाट और उसके आसपास के इलाकों में लागू की गई है. इसी वजह से अंकिता के माता-पिता को वहां से हटाया गया.

भंडारी दंपति सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना और कांग्रेस नेता मुमताज पटेल के साथ प्रार्थना करने के लिए राजघाट गए थे. वीरेंद्र भंडारी ने कहा, “हम यहां अंकिता के लिए प्रार्थना करने और हिम्मत जुटाने आए थे. दिल्ली पुलिस हमारे फोन की लोकेशन पर नज़र रख रही थी. इसलिए जब हम थोड़ा आराम कर रहे थे और पत्रकार हमसे बात करने लगे, तभी पुलिस ने हमें हिरासत में ले लिया.”

आरोप है कि दंपति को करीब दो घंटे तक पुलिस की गाड़ी में बैठाकर रखा गया. उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने हमें करीब दो घंटे तक बिना पानी के गाड़ी में बैठाए रखा. मेरी पत्नी की तबीयत खराब थी और उन्होंने कोई आपातकालीन मदद भी नहीं दी. इसके बजाय वे उस इलाके के बाजारों और सड़कों पर गाड़ी घुमाते रहे.”

आखिर में पुलिस दोनों को बुराड़ी अस्पताल ले गई. वीरेंद्र का आरोप है कि वहां उनकी पत्नी को ठीक से इलाज नहीं दिया गया. उन्होंने कहा, “मेरी पत्नी अस्पताल में उनके व्यवहार से खुश नहीं थीं, इसलिए हम वहां से चले आए. हमें इस सरकार का इलाज या मदद नहीं चाहिए. हमारे साथ पहले ही बहुत बुरा व्यवहार हो चुका है.”

मध्य जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) एम. हर्षवर्धन ने दिप्रिंट को बताया, “अंकिता भंडारी के माता-पिता अनिश्चितकालीन धरना देने की तैयारी में थे, इसलिए उन्हें वहां से हटाया गया. हमें इस बात से कोई परेशानी नहीं है कि वे कुछ मिनट के लिए वहां बैठें, लेकिन जब वहां तैनात पुलिसकर्मियों को पता चला कि वे अनिश्चितकालीन धरना देने वाले हैं, तो हमें उन्हें हिरासत में लेना पड़ा.”

अधिकारी ने आगे कहा कि पुलिस उनके पीछे नजर नहीं रख रही थी, लेकिन जब वे उस जगह पहुंचे तो वहां मौजूद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों ने दिल्ली पुलिस को इसकी जानकारी दी.

उन्होंने कहा, “हमारा उन्हें दो घंटे तक हिरासत में रखने का कोई इरादा नहीं था. लेकिन जब मध्य जिले की पुलिस किसी को हिरासत में लेती है, तो हम उन्हें बुराड़ी या छत्रसाल इलाके में ले जाते हैं. इसलिए जब अंकिता के माता-पिता ने तबीयत खराब होने की बात कही, तो हम उन्हें बुराड़ी अस्पताल ले गए.”

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की गाड़ी में ज्यादा समय लगने की वजह उस दौरान सड़क पर लगा जाम हो सकता है.

यह घटना कुछ हफ्ते बाद हुई है, जब भंडारी दंपति ने राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के खिलाफ प्रदर्शन किया था. परिवार ने आरोप लगाया है कि अंकिता की मौत में गौतम की भूमिका थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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