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Sunday, 26 April, 2026
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निर्वाचन आयोग पिछले दरवाजे से एनआरसी लागू करने की कोशिश कर रहा: ममता बनर्जी

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दीघा, 26 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को भारत निर्वाचन आयोग पर जुलाई 1987 से दिसंबर 2004 के बीच जन्मे मतदाताओं को अलग-थलग करने और ‘मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण’ के नाम पर उनकी नागरिकता के दस्तावेजी सबूत मांगने के लिए निशाना साधा।

ममता बनर्जी ने आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कठपुतली की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या यह कदम राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को पिछले दरवाजे से लागू करने का प्रयास तो नहीं है।

मुख्यमंत्री पूर्वी मेदिनीपुर जिले के तटीय शहर दीघा में संवाददाताओं को संबोधित कर रही थीं।

ममता बनर्जी दीघा में नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में भाग लेने के लिए यहां हैं।

ममता ने कहा, “मुझे निर्वाचन आयोग से दो पत्र मिले हैं और प्रत्येक पत्र 25 से 30 पृष्ठों का है। मैं अब तक उन्हें विस्तार से नहीं पढ़ पाई हूं। लेकिन मैंने जो कुछ भी सरसरी तौर पर समझा है, उसके अनुसार आयोग अब एक जुलाई 1987 से दो दिसंबर 2004 के बीच जन्मे मतदाताओं से घोषणा पत्र मांग रहा है और यहां उन्हें नागरिकता के प्रमाण के रूप में माता-पिता दोनों के जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं निर्वाचन आयोग के इस कदम या इन तिथियों को चुनने के पीछे के तर्क को नहीं समझ पा रही हूं। यह किसी घोटाले से कम नहीं है। मैं आयोग से स्पष्टीकरण चाहती हूं कि क्या वे पिछले दरवाजे से एनआरसी को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। वास्तव में, यह एनआरसी से भी ज्यादा खतरनाक लगता है, जिसका विपक्ष में मौजूद हर राजनीतिक दल को विरोध करना चाहिए।”

ममता बनर्जी ने खुलासा किया कि ये पत्र बिहार सरकार को भेजे गए थे और इसकी एक प्रति उन्हें भी भेजी गई।

ममता ने आरोप लगाया, “बिहार में कुछ नहीं होगा क्योंकि भाजपा उस राज्य में शासन करती है और वहां विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। उनका असली निशाना बंगाल है। वे वैध युवा मतदाताओं के नाम हटाना चाहते हैं। कई माता-पिता अपना जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे। वे बंगाल के प्रवासी श्रमिक समुदाय, विद्यार्थियों, ग्रामीणों और अशिक्षित मतदाताओं को निशाना बना रहे हैं।”

बिहार में विधानसभा चुनाव इस वर्ष के अंत में होने हैं।

ममता ने निर्वाचन आयोग पर भाजपा की इच्छा के अनुसार काम करने का आरोप लगाया और ऐसे नियम बनाने के उसके अधिकार को चुनौती दी।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिए बिना कहा, “देश के लोकतांत्रिक ढांचे को चलाने में अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय और राज्य स्तर के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से परामर्श किए बिना आयोग एकतरफा तरीके से ऐसा कैसे कर सकता है?”

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, “वे (भाजपा और आयोग) हमारे साथ बंधुआ मजदूरों जैसा व्यवहार कर रहे हैं और यह सब केवल एक खास संघ प्रचारक की इच्छाओं को पूरा करने के लिए कर रहे हैं, जो अब सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए देश चला रहे हैं।”

ममता ने जनता से ‘मतदान के अधिकार को छीनने के ऐसे प्रयासों’ से सतर्क रहने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी कि यह कदम ‘भाजपा के लिए उल्टा पड़ेगा’।

भाषा जितेंद्र अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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