नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) निर्वाचन आयोग ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिया तथा तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) का राष्ट्रीय दल का दर्जा वापस ले लिया।
आयोग ने अलग-अलग आदेशों में उत्तर प्रदेश में रालोद, आंध्र प्रदेश में बीआरएस, मणिपुर में पीडीए, पुडुचेरी में पीएमके, पश्चिम बंगाल में आरएसपी और मिजोरम में एमपीसी को दिया गया राज्य स्तर की पार्टी का दर्जा भी खत्म कर दिया।
देश में अब छह दल-भाजपा, कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और आप राष्ट्रीय पार्टी हैं।
आयोग ने कहा कि आप को चार राज्यों-दिल्ली, गोवा, पंजाब और गुजरात में उसके चुनावी प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिया गया है।
आप का गठन अरविंद केजरीवाल ने 2012 में किया था और इसने 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव तथा 2022 में पंजाब में जीत हासिल की।
दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा, ‘‘इतने कम समय में राष्ट्रीय पार्टी? यह चमत्कार से कम नहीं है। सभी को बहुत-बहुत बधाई। देश के करोड़ों लोगों ने हमें यहां पहुंचाया है। लोग हमसे काफी उम्मीदें रखते हैं। आज लोगों ने हमें इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है। ईश्वर हमें इस उत्तरदायित्व को अच्छी तरह से निभाने का आशीर्वाद दें।’’
निर्वाचन आयोग की घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाकपा के राष्ट्रीय सचिव बिनॉय बिस्वम ने कहा, ‘राष्ट्रीय मान्यता निश्चित रूप से तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भाकपा की मान्यता मेहनतकश जनता के दिलों में है। यह जुझारू लोगों के खून, पसीने और आंसुओं से बनी है। पार्टी लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के लिए अपनी लड़ाई तेज करेगी।’’
निर्वाचन आयोग ने कहा कि राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के रूप में राकांपा, भाकपा और तृणमूल कांग्रेस का दर्जा वापस लिया जाता है।
आयोग ने कहा कि राकांपा और तृणमूल कांग्रेस को हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में उनके प्रदर्शन के आधार पर क्रमशः नगालैंड और मेघालय में राज्य स्तर के दलों के रूप में मान्यता दी जाएगी।
इसने नगालैंड में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), मेघालय में वॉयस ऑफ द पीपुल्स पार्टी और त्रिपुरा में टिपरा मोथा को भी ‘मान्यता प्राप्त राज्य स्तर के राजनीतिक दल’ का दर्जा दिया।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि संबंधित दलों के प्रतिनिधियों के साथ गहन समीक्षा और परामर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है।
भाषा नेत्रपाल माधव
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