नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) देश में 2030 तक 100 करोड़ टन कोयले से गैस बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए मंजूरी प्रक्रिया को सुगम बनाने, खरीदारों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत होगी। एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
वैश्विक पेशेवर सेवा कंपनी अल्वारेज एंड मार्सल (एएंडएम) की रिपोर्ट ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए कोयला गैसीकरण : अगली औद्योगिक क्रांति को आकार देना’ का बृहस्पतिवार को यहां ‘गैसीकरण शिखर सम्मेलन’ में विमोचन किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि कोयला मंत्रालय ने 2030 तक 100 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य हासिल करने के लिए 25 परियोजनाओं में 2.5 लाख करोड़ रुपये से तीन लाख करोड़ रुपये तक के निवेश का अनुमान लगाया है।
इसमें तय समयसीमा के साथ एकल खिड़की मंजूरी व्यवस्था, परियोजनाओं को वित्तपोषण योग्य बनाने के लिए दीर्घकालिक खरीद समझौते और भारत के अधिक राख वाले कोयले के अनुकूल प्रौद्योगिकी की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, कोयला गैसीकरण से मेथनॉल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों के आयात पर भारत की निर्भरता कम हो सकती है। इससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को समर्थन मिलेगा।
भारत के पास दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा कोयला भंडार है, लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 में देश की मेथनॉल खपत का करीब 94 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की खपत का लगभग 50 प्रतिशत आयात से पूरा हुआ। वित्त वर्ष 2025-26 में प्राकृतिक गैस का आयात करीब 1.18 लाख करोड़ रुपये और यूरिया का आयात करीब 46,000 करोड़ रुपये का था।
रिपोर्ट में भारत के एथनॉल कार्यक्रम और अमेरिका के ग्रेट प्लेन्स संयंत्र जैसे दीर्घकालिक खरीद मॉडल का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया कि कोल इंडिया, भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड की लखनपुर परियोजना से उत्पादित अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग खदानों में विस्फोट के लिए करेगी।
रिपोर्ट में अधिक राख वाले भारतीय कोयले के अनुकूल ‘गैसीफायर’ विकसित करने के लिए अनुसंधान एवं विकास तथा प्रायोगिक परियोजनाओं के वित्तपोषण, साझा बुनियादी ढांचे वाले एकीकृत औद्योगिक केंद्रों और परियोजनाओं की रूपरेखा में ही पर्यावरण सुरक्षा उपायों को शामिल करने की जरूरत बताई गई है।
इसमें कहा गया कि उचित नीतिगत एवं वाणिज्यिक समर्थन मिलने पर कोयला गैसीकरण अलग-अलग परियोजनाओं तक सीमित रहने के बजाय एकीकृत मूल्य श्रृंखला का रूप ले सकता है और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में सार्थक योगदान दे सकता है।
भाषा निहारिका अजय
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