नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) देश में तांबे की मांग बीते वित्त वर्ष (2025-26) में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 2,100 किलो टन हो गई। बुनियादी ढांचा, वाहन और भवन एवं निर्माण क्षेत्रों में मजबूत मांग से इसमें वृद्धि हुई। इंटरनेशनल कॉपर एसोसिएशन इंडिया (आईसीए इंडिया) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
वित्त वर्ष 2024-25 में देश में तांबे की मांग 1,878 किलो टन रही थी।
आईसीए इंडिया के जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में तांबे की मांग 12 प्रतिशत बढ़ी, जो इस दौरान देश की 7.7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर से काफी अधिक है। वित्त वर्ष 2024-25 में तांबे की मांग में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।
मांग में वृद्धि की प्रमुख वजह बुनियादी ढांचा, वाहन और भवन एवं निर्माण क्षेत्र रहे। इन क्षेत्रों में बिजली के तार एवं केबल, ट्रांसफार्मर, मोटर, वाहन की वायरिंग और अन्य विद्युत एवं औद्योगिक शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में बुनियादी ढांचा क्षेत्र तांबे की अतिरिक्त मांग बढ़ाने वाला सबसे बड़ा कारक रहा। देश में तांबे की कुल मांग में 22 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले इस क्षेत्र में सालाना आधार पर 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
वाहन क्षेत्र में भी वित्त वर्ष 2024-25 की धीमी वृद्धि के बाद सुधार देखा गया। यात्री वाहनों, वाणिज्यिक वाहनों और ट्रैक्टर की बिक्री बढ़ने से इस क्षेत्र में तांबे की मांग 14 प्रतिशत बढ़ी।
देश में तांबे की कुल मांग में करीब एक-चौथाई हिस्सेदारी रखने वाले भवन एवं निर्माण क्षेत्र में मांग नौ प्रतिशत बढ़ी। प्रीमियम आवासीय परियोजनाओं, वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र की गतिविधियों और शहरीकरण जारी रहने से इमारतों में इस्तेमाल होने वाले तार, बिजली के केबल, निर्माण संबंधी उपकरणों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की मांग को समर्थन मिला।
आंकड़ों के अनुसार, देश में डेटा सेंटर की स्थापना अभी शुरुआती चरण में है और तांबे की कुल मांग में इसका योगदान एक प्रतिशत से भी कम रहा।
आईसीए इंडिया के प्रबंध निदेशक मयूर करमारकर ने कहा, ”भारत की आर्थिक गतिविधियों में तेजी तांबे की बढ़ती मांग में दिखाई देती है। बुनियादी ढांचे, औद्योगीकरण और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव में निवेश को बढ़ावा देने वाली अनुकूल नीतियां तांबे की मांग में वृद्धि जारी रखने में मदद करेंगी।”
भाषा योगेश अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.