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Wednesday, 4 November, 2026
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सेबी ने देश के बाहर रहने वाले लोगों के लिए केवाईसी नियमों में ढील दी, डिजिटल पंजीकरण की अनुमति

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नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बुधवार को प्रवासी भारतीयों (एनआरआई), भारतीय मूल के विदेशी नागरिक (ओसीआई) और विदेशी नागरिक समेत भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों के लिए अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) संबंधी नियमों में ढील दी है। इसके तहत वे डिजिटल माध्यम से पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

अब वे वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के मानकों का पालन करने वाले देशों में रहते हुए भारत में आए बिना यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

सेबी ने अपने परिपत्र में कहा कि संशोधित व्यवस्था तीन दिसंबर से लागू होगी।

इस व्यवस्था के तहत सेबी में पंजीकृत मध्यस्थ ऐसे ग्राहकों से केवाईसी संबंधी जानकारी और संबंधित दस्तावेज डिजिटल माध्यम से स्वीकार कर सकेंगे। इसके लिए पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान उनका भारत में शारीरिक रूप से मौजूद रहना जरूरी नहीं होगा।

इस कदम का उद्देश्य विदेश में रहने वाले निवेशकों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना और अनुपालन संबंधी जरूरतों को आसान करना है।

सेबी ने कहा, ‘‘भारत से बाहर रहने वाले किसी व्यक्ति (पीआरओआई) ग्राहक के पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मौजूदा केवाईसी प्रावधानों की समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है। भारत से बाहर रहने वाले व्यक्तिगत ग्राहकों में प्रवासी भारतीय (एनआरआई), भारतीय मूल के विदेशी नागरिक (ओसीआई) या विदेशी नागरिक शामिल होंगे।”

नियामक ने कहा, ”वित्तीय कार्रवाई कार्यबल के मानकों का पालन करने वाले देश में रह रहे ऐसे व्यक्तिगत ग्राहक के लिए डिजिटल पंजीकरण के दौरान भारत में मौजूद रहने की अनिवार्यता में ढील दी जा रही है। मध्यस्थ ऐसे ग्राहक से केवाईसी संबंधी जानकारी और संबंधित दस्तावेज डिजिटल माध्यम से स्वीकार कर सकते हैं।”

सेबी ने केवाईसी रिकॉर्ड के एक मध्यस्थ से दूसरे मध्यस्थ के पास इस्तेमाल की सुविधा भी बढ़ाई है। उसने केवाईसी पंजीकरण एजेंसियों (केआरए) को निर्देश दिया है कि जहां भी किसी ग्राहक की व्यक्तिगत जानकारी का सत्यापन आधिकारिक या मूल आंकड़ा स्रोतों से किया गया है, उसे ‘सत्यापित’ के रूप में दर्ज किया जाए।

केवाईसी रिकॉर्ड का अन्य मध्यस्थों के साथ आदान-प्रदान किया जा सकेगा, भले ही उसमें दर्ज हर जानकारी का सत्यापन नहीं हुआ हो।

इसके अलावा, मध्यस्थों को केआरए या केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री (सीकेवाईसीआरआर) में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी अन्य सेबी-पंजीकृत मध्यस्थ या अन्य वित्तीय क्षेत्र के नियामक के अधीन आने वाली इकाई द्वारा की गई केवाईसी प्रक्रिया पर भरोसा करने की अनुमति होगी।

हालांकि, केवाईसी नियमों के अनुपालन की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित मध्यस्थ की ही होगी। इसमें ग्राहक की जोखिम श्रेणी के आधार पर अतिरिक्त जांच-पड़ताल करना भी शामिल है।

संशोधित नियमों के तहत मध्यस्थों को ग्राहक का स्थायी खाता संख्या (पैन), पासपोर्ट और जहां लागू हो, वहां ओसीआई कार्ड लेना होगा। इसके साथ ही पहचान और पते का प्रमाण भी जुटाना होगा। भारत से बाहर रहने वाले ऐसे ग्राहकों के मामले में विदेश का पता ही उनका मौजूदा पता माना जाएगा।

नियामक ने केवाईसी फॉर्म और नमूना हस्ताक्षर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जमा करने की भी अनुमति दी है। यह निर्धारित सत्यापन शर्तों पर निर्भर करेगा।

सेबी के अनुसार, मध्यस्थों को केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के तीन कार्यदिवस के भीतर ऐसे व्यक्तिगत ग्राहकों की केवाईसी जानकारी केआरए को देनी होगी।

संशोधित व्यवस्था एफएटीएफ के मानकों का पालन करने वाले देशों में रह रहे ग्राहकों की दोबारा केवाईसी प्रक्रिया पर भी लागू होगी।

भाषा रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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