नयी दिल्ली, दो नवंबर (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को निजी तौर पर सूचीबद्ध और कम तरलता वाले अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) के बिक्री पेशकश (ओएफएस) लेनदेन के लिए कूलिंग-ऑफ अवधि 12 सप्ताह से घटाकर आठ सप्ताह कर दी।
कूलिंग ऑफ अवधि का अर्थ उस निश्चित समयावधि से है, जिसमें निवेशक या संबंधित पक्ष को कोई अगला कदम उठाने से पहले प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
ओएफएस से पहले और बाद में शेयरों की खरीद-बिक्री पर लागू कूलिंग-ऑफ अवधि उनकी तरलता के आधार पर तय होती है। सबसे अधिक तरल शेयरों के लिए यह अवधि दो सप्ताह, सामान्य तरलता वाले शेयरों के लिए चार सप्ताह और कम तरलता वाले शेयरों के लिए 12 सप्ताह है।
निजी तौर पर सूचीबद्ध इनविट में लेनदेन की मात्रा आमतौर पर कम रहती है। इसकी एक वजह एक बार में खरीदी-बेची जाने वाली यूनिट की अधिक संख्या है। इससे इनमें मुख्य रूप से संस्थागत निवेशकों, कंपनियों और बड़े निवेशकों की ही भागीदारी रहती है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने परिपत्र में कहा, ‘‘बाजार प्रतिभागियों से मिली प्रतिक्रिया और कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए निजी तौर पर सूचीबद्ध कम तरलता वाले इनविट के लिए कूलिंग-ऑफ अवधि घटाने का फैसला किया गया है। ऐसे इनविट के मामले में यह अवधि आठ सप्ताह होगी।’’
बाजार नियामक ने कहा कि यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगा।
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