मुंबई, 26 अक्टूबर (भाषा) अभिनेता सयाजी शिंदे के नेतृत्व में पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के करजत तालुका में गुजरात की कंपनी टोरेंट पावर की प्रस्तावित परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का विरोध करते हुए सोमवार को एकजुट होकर इसका विरोध करने का आह्वान किया।
शिंदे ने लोगों से अपील की कि वे 3,000 मेगावाट की जल ऊर्जा परियोजना के लिए एक भी पेड़ न काटने दें। उन्होंने पेड़ों की कटाई के लिए आने वाले लोगों को थाली और कटोरे बजाकर भगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह कदम कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर में एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए किए गए ऐसे ही प्रयास की तर्ज पर उठाया जाना चाहिए।
मुंबई मराठी पत्रकार संघ में संवाददाताओं से बातचीत में शिंदे ने कहा, ‘‘अगर कोई पेड़ काटने आता है, तो उसे कोविड-19 से भी ज्यादा खतरनाक बीमारी समझें और थाली-कटोरी बजाकर उसे भगा दें।’’
दिग्गज अभिनेता ने कहा कि पेड़ों को काटना ‘‘बम गिराने’’ के समान है, क्योंकि इससे पशु-पक्षियों के घर नष्ट हो जाते हैं।
दक्षिण मुंबई से करीब 75 किलोमीटर दूर करजत में भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के पास टोरेंट पावर की परियोजना प्रस्तावित है। इस बड़ी परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है और इससे संबंधित वीडियो सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित हो रहे हैं।
संवाददाता सम्मेलन में पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 13,505 करोड़ रुपये की इस परियोजना का शिलान्यास किए जाने के समय राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान थाली और कटोरे बजाकर पेड़ों की कटाई के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को विपक्ष पर रायगढ़ जिले की इस जलविद्युत परियोजना को लेकर भ्रामक विमर्श खड़ा करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि परियोजना स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन में योगदान देगी और बिजली की सर्वाधिक मांग के समय जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होगी।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता जताई है।
टोरेंट पावर ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं के बीच करजत में अपनी प्रस्तावित 3,000 मेगावाट की पंप स्टोरेज परियोजना का बचाव किया है। कंपनी का कहना है कि यह परियोजना भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित है और इसके सभी घटक अभयारण्य तथा उसके पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र से बाहर हैं।
कंपनी ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ यह परियोजना बिजली ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगी। इससे शाम के समय बिजली की अधिक मांग पूरी करने के लिए कोयले पर निर्भरता भी कम होगी। कंपनी ने अभयारण्य के भीतर पेड़ों की कटाई संबंधी खबरों को गलत जानकारी पर आधारित बताते हुए खारिज किया।
बयान में कहा गया, ‘‘परियोजना को वैधानिक मंजूरियां मिलने से पहले करीब 18 महीने तक व्यापक प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इसमें विस्तृत अध्ययन, जनसुनवाई, विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति और वन सलाहकार समिति द्वारा समीक्षा, कई बार स्थल निरीक्षण तथा मंजूरी संबंधी शर्तें शामिल थीं। इसके बाद परियोजना को पर्यावरण मंजूरी, वन मंजूरी और वन भूमि के उपयोग संबंधी आदेश सहित सभी वैधानिक स्वीकृतियां मिलीं।’’
भाष राजेश राजेश अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.