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Monday, 2 November, 2026
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चालू चीनी सत्र के पहले महीने में उत्पादन 8.45 लाख टन, पिछले साल के एक लाख टन से अधिक

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नयी दिल्ली, दो नवंबर (भाषा) देश में आठ अक्टूबर से शुरू हुए 2026-27 के चीनी सत्र के पहले महीने में 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। इससे त्योहारी मौसम के दौरान घरेलू आपूर्ति बढ़ने में मदद मिली है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (एनएफसीएसएफ) ने सोमवार को यह जानकारी दी।

एक साल पहले की समान अवधि में चीनी का उत्पादन एक लाख टन था। वर्ष 2025-26 के पूरे चीनी सत्र (अक्टूबर-सितंबर) में कुल 279.60 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

महासंघ के मुताबिक, 31 अक्टूबर तक देश में 152 चीनी मिलें चालू थीं, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 31 मिलें परिचालन में थीं।

देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में सबसे अधिक 7.20 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में उत्पादन शून्य था। राज्य में करीब 123 मिलें चालू थीं। महाराष्ट्र में आमतौर पर गन्ने की पेराई 15 नवंबर से शुरू होती है, लेकिन इस साल करीब एक महीने पहले ही पेराई शुरू कर दी गई।

तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य कर्नाटक में 31 अक्टूबर तक सात मिलों ने 80,000 टन चीनी का उत्पादन किया। पिछले साल इसी अवधि में 17 मिलों ने 70,000 टन चीनी का उत्पादन किया था। इस दौरान मिलों ने करीब 8.33 लाख टन गन्ने की पेराई की।

देश के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में तीन मिलों ने परिचालन शुरू कर दिया है, हालांकि अभी तक उत्पादन के आंकड़े उपलब्ध नहीं हुए हैं।

एनएफसीएसएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवारे ने कहा, ”जल्दी पेराई शुरू होने से महाराष्ट्र के किसानों को पानी की कमी के कारण गन्ने की फसल सूखने से बचाने में मदद मिली है। साथ ही, त्योहारी मौसम में चीनी की उपलब्धता भी बढ़ी है।”

चीनी उत्पादन में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब कर्नाटक और महाराष्ट्र में गन्ना उत्पादक किसान गन्ने पर अधिक समर्थन मूल्य और चीनी एवं एथनॉल के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है। इस समिति ने पिछले सप्ताह कर्नाटक के गन्ना किसानों के साथ बैठक की थी।

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में हुई बातचीत से किसान संतुष्ट नहीं हुए।

यह समिति चार नवंबर को पुणे में महाराष्ट्र के किसानों से मुलाकात करेगी। किसानों ने सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए बैठक से एक दिन पहले, तीन नवंबर को राजमार्ग जाम करने का आह्वान किया है।

भाषा राजेश राजेश योगेश

योगेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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