नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर (भाषा) रिलायंस इंडस्ट्रीज की अनुषंगी जियो प्लेटफॉर्म्स लि. का 30,213 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को निवेशकों ने हाथों-हाथ लिया है। बुधवार को निर्गम खुलने के 100 मिनट के भीतर ही इसे पूर्ण अभिदान मिल गया। इसके साथ ही यह भारत में सबसे तेजी से पूरी बोली हासिल करने वाला आईपीओ बन गया।
शेयर बाजारों के आंकड़ों के मुताबिक, शाम पांच बजे तक निवेशकों ने 62.36 करोड़ शेयरों के लिए करीब 69,800 करोड़ रुपये की बोलियां लगाई थीं।
देश का अबतक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने जा रहे इस निर्गम को बिक्री के लिए रखे गए 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले 3.16 गुना अभिदान मिला। इसमें संस्थागत निवेशकों की मांग सबसे अधिक रही। यह निर्गम 23 अक्टूबर को बंद होगा।
बड़े यानी एंकर निवेशकों से मिली प्रतिबद्धताओं को मिलाकर आईपीओ के तहत अब तक करीब 77,892 करोड़ रुपये की मांग आई है।
बड़े निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से और आम निवेशकों की बोलियों को मिलाकर कुल मांग अबतक 3.20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
आईपीओ खुलने के पहले दिन पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) की श्रेणी में 9.42 गुना अभिदान मिला। वहीं गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से के मुकाबले 1.68 गुना बोलियां मिलीं।
खुदरा व्यक्तिगत निवेशकों की श्रेणी में 0.73 गुना अभिदान मिला। कर्मचारियों के लिए आरक्षित हिस्से को 1.37 गुना, जबकि शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्से को 1.46 गुना बोलियां मिलीं।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को आईपीओ खुलने के महज 100 मिनट के भीतर पेश किए गए सभी शेयरों के लिए बोलियां मिल गईं।
शुरुआती बोली की यह रफ्तार जियो को भारत के अन्य बड़े सार्वजनिक निर्गमों से अलग करती है। बजाज हाउसिंग फाइनेंस के आईपीओ को खुलने वाले दिन दोपहर दो बजे तक पूरा अभिदान मिल गया था, जबकि एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के आईपीओ को 2025 में पहले दिन के अंत तक पूरा अभिदान मिला था। इससे पहले भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम का रिकॉर्ड रखने वाले हुंदै मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ को 2024 में पहले दिन के अंत तक केवल 18 प्रतिशत अभिदान मिला था।
जियो का आईपीओ शेयर जारी करने के तरीके के मामले में भी हुंदै और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्गम से अलग है। उन दोनों कंपनियों के आईपीओ पूरी तरह मौजूदा शेयरधारकों की ओर से शेयरों की बिक्री के लिए थे। इसके विपरीत, जियो 27 करोड़ तक नए शेयर जारी कर रही है। इसका मतलब है कि निर्गम से मिलने वाली राशि कंपनी को मिलेगी, न कि हिस्सेदारी बेचने वाले शेयरधारकों को।
जियो के आईपीओ के लिए प्रति शेयर मूल्य दायरा 1,065 से 1,119 रुपये तय किया गया है। ऊपरी मूल्य पर जियो प्लेटफॉर्म्स का मूल्यांकन करीब 108 अरब डॉलर बैठता है। यह निर्गम हुंदै मोटर इंडिया के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने वाला है और उद्योगपति मुकेश अंबानी के नियंत्रण वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के डिजिटल एवं दूरसंचार कारोबार के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है।
यह आईपीओ निवेशकों की उस महत्वाकांक्षा के प्रति रुचि की भी बड़ी परीक्षा है, जिसके तहत जियो दूरसंचार संपर्क सेवाओं से आगे बढ़कर डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और कृत्रिम मेधा के क्षेत्र में विस्तार करना चाहती है। कंपनी ने इन कारोबार के विस्तार के लिए 53.33 करोड़ ग्राहकों के अपने आधार को प्रमुख ताकत बताया है। कंपनी का लक्ष्य दूरसंचार क्षेत्र में अपनी व्यापक पहुंच का उपयोग कर अधिक लाभ मार्जिन वाले उद्यम और प्रौद्योगिकी कारोबार से आय बढ़ाना है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, आईपीओ को मिल रही मांग में संस्थागत निवेशक लगातार प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, जबकि खुदरा निवेशकों की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। निर्गम शुक्रवार को बंद होगा।
आईपीओ के तहत पूरी तरह नए 27 करोड़ शेयर जारी किए जा रहे हैं। इनका मूल्य दायरा 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर है। मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर जियो प्लेटफॉर्म्स करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाएगी।
इस निर्गम में मूल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड या उसके अन्य मौजूदा शेयरधारक कोई शेयर नहीं बेच रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने 19 अक्टूबर को 212 बड़े निवेशकों से करीब 8,110 करोड़ रुपये जुटाए थे। इन निवेशकों को 1,119 रुपये प्रति शेयर की दर से शेयर आवंटित किए गए, जो मूल्य दायरे का ऊपरी स्तर है।
सूत्रों के अनुसार, बड़े निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से में 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बोलियां आई थीं, जो उपलब्ध आवंटन से 30 गुना से भी ज्यादा थीं। इनमें ब्लैकरॉक, फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स, जीआईसी और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे वैश्विक परिसंपत्ति प्रबंधक और सरकारी निवेश कोष शामिल हैं।
जियो प्लेटफॉर्म्स की योजना निर्गम से प्राप्त राशि में से 27,500 करोड़ रुपये तक का उपयोग अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में करने की है। शेष राशि का उपयोग पूंजीगत व्यय, प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल सेवाओं में निवेश और कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा।
भाषा रमण अजय
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