(सुजीत नाथ)
श्री विजय पुरम, 25 मई (भाषा) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल डी के जोशी ने सोमवार को कहा कि द्वीप समूह में दशकों की निष्क्रियता के बाद अपतटीय तेल खोज अभियान में तेजी आई है और शुरुआती निष्कर्षों से इस क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन की प्रचुर संभावनाएं होने के संकेत मिले हैं।
जोशी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि अंडमान बेसिन में हाल ही में किए गए खोजी कुओं की खुदाई से उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।
उन्होंने कहा, “श्री विजय पुरम-2 खोजी कुएं में ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) द्वारा की गई खुदाई में लगभग 87 प्रतिशत मीथेन वाली गैस मिलने के संकेत मिले हैं। इसके अलावा एक अन्य क्षेत्र में कच्चे तेल की मौजूदगी की भी प्रबल संभावना दिखाई दी है। फिलहाल आंकड़ों के सत्यापन और व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन किया जा रहा है।”
जोशी ने कहा कि आगामी तेल ब्लॉक नीलामी से पहले अंडमान बेसिन को लेकर वैश्विक ऊर्जा कंपनियों की रुचि बढ़ी है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां संयुक्त उद्यम की संभावनाओं को लेकर ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) और ओआईएल के साथ बातचीत कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि इन साझेदारियों से निवेश के साथ-साथ गहरे समुद्र में खोज के लिए अत्याधुनिक तकनीक और विशेष उपकरण भी उपलब्ध होंगे।
उपराज्यपाल ने कहा कि भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) का लगभग एक-तिहाई और देश की समुद्री तटरेखा का एक-चौथाई हिस्सा होने के बावजूद स्वतंत्रता के बाद शुरुआती छह-सात दशक तक इस क्षेत्र में अपतटीय खोज नहीं हो सकी, क्योंकि आसपास के समुद्री क्षेत्रों को ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ घोषित किया गया था। बाद में इस मुद्दे को द्वीप विकास एजेंसी के समक्ष उठाया गया, जिसके बाद खोज गतिविधियों का रास्ता साफ हुआ।
जोशी ने कहा कि अंडमान बेसिन की दीर्घकालिक क्षमता को लेकर उम्मीद बढ़ रही है और कुछ आकलनों में इसकी तुलना दुनिया की बड़ी ऊर्जा खोजों से की जा रही है।
पर्यटन क्षेत्र पर जोशी ने कहा कि प्रशासन ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत चार बड़ी परियोजनाएं निजी कंपनियों को सौंपी हैं।
भाषा योगेश अजय
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