नई दिल्ली: गंगा दशहरा के अवसर पर एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव के ब्लॉग में जल संरक्षण और भारतीय संस्कृति के गहरे संबंध पर विशेष प्रकाश डाला गया है. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों को देवी स्वरूप माना गया है और गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप मिला है. अमृत सरोवर योजना के तहत हजारों जल संरचनाओं का निर्माण हुआ है, जिससे वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण में सुधार हुआ है. नमामि गंगे, कैच द रेन और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी पहलों ने जल प्रबंधन को नई दिशा दी है.
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नदियों, तालाबों और बावड़ियों का पुनरुद्धार किया जा रहा है. हजारों चेकडैम और जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें जनभागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. इससे भूजल स्तर में सुधार और कृषि उत्पादन में वृद्धि हो रही है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण केवल नीति नहीं बल्कि जीवन शैली है और इसे जन आंदोलन बनाना समय की आवश्यकता है. यह अभियान आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-संपन्न भविष्य की नींव रख रहा है.