नयी दिल्ली, 13 नवंबर (भाषा) सेंटर फॉर डोमेस्टिक इकॉनमी पॉलिसी रिसर्च (सी-डीईपी डॉट इन) की एक रिपोर्ट में बृहस्पतिवार को कहा गया है कि भारत को खराब गुणवत्ता वाले पीवीसी रेजिन के आयात से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है, जिसमें वैश्विक सुरक्षा सीमा से पांच गुना अधिक स्तर तक के कैंसरकारी तत्व शामिल हैं।
आईआईटी दिल्ली में जारी की गई इस रिपोर्ट से पता चला है कि आयातित पीवीसी रेजिन में उच्च स्तर के अवशिष्ट विनाइल क्लोराइड मोनोमर (आरवीसीएम) होते हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी द्वारा श्रेणी वन ए कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
पीवीसी वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है, जिसका व्यापक उपयोग जल, स्वच्छता, सिंचाई, स्वास्थ्य सेवा, निर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में होता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि पीवीसी रेजिन पर सरकार का प्रस्तावित गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ), जिसे पहली बार अगस्त, 2024 में अधिसूचित किया गया था, तीन बार स्थगित किया जा चुका है और अब इसे दिसंबर, 2025 में लागू किया जाना है।
सी-डीईपी.इन के अध्यक्ष डॉ. जयजीत भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी सरकार गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को अपनाकर शून्य दोष, शून्य प्रभाव की नीति को आगे बढ़ा रही है। सरकार का यह नीतिगत कदम उपभोक्ता सुरक्षा और औद्योगिक मानकों को मजबूत कर रहा है, साथ ही भारत से विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाले निर्यात को बढ़ावा दे रहा है।’’
इस अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच के अनिल शर्मा ने कहा, ‘‘गुणवत्ता नियंत्रण आदेश केवल तैयार माल तक ही सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि कच्चे माल को भी शामिल करना उतना ही या उससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी अंतिम उत्पाद की गुणवत्ता उतनी ही मज़बूत होती है जितनी उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री।’’
शर्मा ने कहा, ‘‘स्वदेशी जागरण मंच एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। हम घरेलू उद्योगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने पर केंद्रित हैं।’’
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