नई दिल्ली: इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में रूस से भारत का सामान का आयात पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 52.59 प्रतिशत बढ़ गया. इससे पता चलता है कि पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदा है.
मॉस्को से सामान के आयात में इस बढ़ोतरी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर वी. पुतिन ने सोमवार को तारीफ की. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो दिवसीय मॉस्को यात्रा के दौरान पुतिन से मुलाकात की थी. अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीद कम करने के दबाव के बीच पुतिन ने दोनों देशों के बीच व्यापार में हुई बड़ी बढ़ोतरी का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया.
जयशंकर ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की ज़रूरत पर जोर दिया. उन्होंने भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन की ओर भी ध्यान दिलाया.
पिछले पांच साल में भारत का रूस से आयात और दोनों देशों का कुल व्यापार लगभग चार गुना बढ़ा है. वहीं, इसी दौरान भारत का सामान का निर्यात करीब 38 प्रतिशत बढ़ा है.

इस साल फरवरी में पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद, जब अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हमले किए, तो दुनिया में तेल की कीमतें बढ़कर ब्रेंट क्रूड इंडेक्स पर 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गईं. बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए अमेरिका ने रूस से तेल खरीद पर छूट दी. इससे कंपनियों को रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने की अनुमति मिल गई.
हालांकि, 17 जून को यह छूट खत्म हो गई. इसके बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद और बढ़ा दी. मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से करीब 23.61 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा. यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 55 प्रतिशत ज्यादा है. वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारत ने रूस से करीब 15.14 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया था.
मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत का रूस के साथ कुल व्यापार 50.48 प्रतिशत बढ़कर 26.82 अरब डॉलर हो गया. पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 17.82 अरब डॉलर था. हालांकि, पहली तिमाही में भारत के निर्यात में करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद यह अभी भी काफी कम है. भारत का सामान का निर्यात 1.24 अरब डॉलर रहा, जो पिछली तिमाही के 1.061 अरब डॉलर से बढ़कर हुआ है.

2021-2022 में, यानी रूस के यूक्रेन पर हमले से पहले वाले आखिरी वित्त वर्ष में, दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 13.1 अरब डॉलर था. रूस को भारत का निर्यात 3.25 अरब डॉलर था, जबकि रूस से भारत का आयात करीब 9.8 अरब डॉलर था. इसका मतलब था कि रूस के पक्ष में करीब 6.5 अरब डॉलर का व्यापार घाटा था.
हालांकि, फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले और इसके बाद पश्चिमी देशों, खासकर G7 के सदस्यों—अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, जापान, इटली, फ्रांस और यूरोपीय संघ (EU)—की ओर से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों से दुनिया के ऊर्जा बाजार पर संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ गई.
उस समय राष्ट्रपति जोसेफ आर. बाइडेन के नेतृत्व वाले अमेरिका ने भारत से रूस का तेल खरीदने को कहा था, ताकि वैश्विक बाजारों को स्थिर रखने में मदद मिल सके. 2022-2023 में रूस के साथ भारत का कुल सामान व्यापार 276 प्रतिशत बढ़कर 49.359 अरब डॉलर हो गया. इसकी मुख्य वजह रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात था.
उस साल भारत ने रूस से करीब 38.81 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया, जो इससे पिछले साल के 5.25 अरब डॉलर से काफी ज्यादा था. इससे पता चलता है कि भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों ने सस्ते रूसी तेल की ओर कितने बड़े स्तर पर रुख किया.
2022-2023 में रूस को भारत का निर्यात वास्तव में घटकर करीब 3.1 अरब डॉलर रह गया. इससे पता चलता है कि घरेलू कंपनियों के लिए रूस में अपना सामान बेचना कितना मुश्किल था. यह ध्यान देने वाली बात है कि जी7 देशों ने रूस के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया था. रूस के साथ व्यापार जारी रखने के कारण कुछ भारतीय कंपनियों पर भी पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए.
भारतीय सेना को हथियारों की सप्लाई करने वाली लोकेश मशीन टूल्स उन 19 कंपनियों में शामिल थी, जिन पर 2024 में शुरुआत में प्रतिबंध लगाए गए थे. जून 2026 में इस कंपनी को प्रतिबंधों की सूची से हटा दिया गया.

तेल के अलावा सबसे ज्यादा आयात
रूस के साथ भारत का व्यापार काफी हद तक कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहा है. इसके अलावा भारत रूस से जो प्रमुख सामान आयात करता है, उनमें उर्वरक, पशु या वनस्पति से मिलने वाली चर्बी और अर्ध-कीमती पत्थर शामिल हैं. 2021-2022 में भारत ने करीब 77.3 करोड़ डॉलर के उर्वरक, 49.413 करोड़ डॉलर की पशु या वनस्पति चर्बी और 1.25 अरब डॉलर के अर्ध-कीमती पत्थर आयात किए.
अगले साल भारत ने रूस से 3 अरब डॉलर से ज्यादा के उर्वरक, करीब 1 अरब डॉलर की पशु या वनस्पति चर्बी और करीब 1.35 अरब डॉलर के अर्ध-कीमती पत्थर आयात किए. हालांकि, रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात के मुकाबले ये रकम बहुत कम थी. 2023-2024 में कच्चे तेल के अलावा, रूस से भारत का उर्वरक आयात 2 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया. उस साल भारत के दूसरे बड़े आयातों, जिनकी कीमत 1 अरब डॉलर से ज्यादा थी, में पशु या वनस्पति चर्बी और अर्ध-कीमती पत्थर शामिल थे.

2024-2025 में रूस से भारत का उर्वरक आयात पिछले साल के 2 अरब डॉलर से ज्यादा के आंकड़े से घटकर 1.83 अरब डॉलर रह गया. उस साल भारत का पशु या वनस्पति चर्बी का आयात बढ़कर 2.39 अरब डॉलर हो गया, जबकि अर्ध-कीमती पत्थरों का आयात तेजी से घटकर करीब 43.5 करोड़ डॉलर रह गया. अगले साल भारत का उर्वरक आयात बढ़कर 3.117 अरब डॉलर हो गया, जबकि पशु या वनस्पति चर्बी का आयात घटकर करीब 1.6 अरब डॉलर रह गया. अर्ध-कीमती पत्थरों का आयात और घटकर करीब 37.554 करोड़ डॉलर रह गया.
अर्ध-कीमती पत्थरों के आयात में यह गिरावट G7 देशों की ओर से रूस से गैर-औद्योगिक हीरों के निर्यात से जुड़े ज्यादातर रास्तों को बंद करने के साथ हुई. रूस के हीरे और रत्नों के व्यापार पर लगाए गए प्रतिबंधों का भारतीय हीरा उद्योग पर असर पड़ा है, खासकर सूरत में मौजूद हीरा उद्योग के बड़े केंद्र पर.

तेल की वजह से भारत-रूस व्यापार 50 अरब डॉलर के पार
2023-2024 और 2024-2025 में रूस के साथ भारत का व्यापार लगातार बढ़ता रहा और 60 अरब डॉलर के पार पहुंच गया. इसकी वजह यह थी कि भारत की तेल रिफाइनरियों ने रूस से कच्चे तेल का आयात लगातार बढ़ाया. 2023-2024 में रूस के साथ भारत का कुल व्यापार 65.42 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 32 प्रतिशत ज्यादा था.
रूस से भारत का सामान का आयात 61.15 अरब डॉलर रहा, जबकि भारत का निर्यात केवल 4.2 अरब डॉलर रहा. यानी रूस के पक्ष में करीब 57 अरब डॉलर का व्यापार घाटा था. 2023-2024 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़कर 54.2 अरब डॉलर हो गया, जो इससे पिछले साल करीब 38.81 अरब डॉलर था.
अगला साल रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात के लिए सबसे ऊंचे स्तर वाला साल रहा. 2024-2025 में भारत ने रूस से 56.87 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया. उस साल रूस से भारत का सामान का आयात 63.811 अरब डॉलर रहा और कुल व्यापार 68.69 अरब डॉलर तक पहुंच गया. रूस को भारत का निर्यात भी लगातार बढ़ा और 4.881 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
वित्त वर्ष 2024-2025, डोनाल्ड जे. ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले का आखिरी वित्त वर्ष था. उन्होंने जनवरी 2025 में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया और रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने का रास्ता तलाशते हुए भारत पर रूस से तेल की खरीद कम करने का दबाव डालना शुरू कर दिया.
ट्रंप ने अगस्त 2025 में भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जो फरवरी 2026 तक लागू रहा. अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच अमेरिका के बाजार में भारतीय सामान भेजने वालों पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया. इसमें 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ और 25 प्रतिशत बेस टैरिफ शामिल था.
पिछली अमेरिकी सरकार की ओर से रूस का तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किए जाने के मुकाबले अमेरिकी सरकार के रुख में तेजी से आए बदलाव का असर रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात पर पड़ा. 2025-2026 में रूस से भारत का आयात 13 प्रतिशत घटकर 55.36 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले साल 63.81 अरब डॉलर था.
रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात 15 प्रतिशत घटकर 47 अरब डॉलर रह गया, क्योंकि भारतीय रिफाइनरियों ने रूस के तेल पर अपनी निर्भरता कम करने और दूसरे स्रोतों से तेल लेने की कोशिश की. इसके बावजूद रूस भारत को कच्चा तेल देने वाला सबसे बड़ा देश बना रहा. दूसरे सबसे बड़े सप्लायर UAE ने पिछले वित्त वर्ष में भारत को 24.2 अरब डॉलर का कच्चा तेल भेजा. इससे भारत के लिए ऊर्जा के दो सबसे बड़े स्रोतों के बीच का अंतर पता चलता है.
2024 में, जब भारत और रूस के बीच तेल का व्यापार तेजी से बढ़ रहा था, तब मोदी और पुतिन ने दोनों देशों के बीच व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा था. इस बड़े लक्ष्य के साथ भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की बात भी कही गई थी. EAEU एक साझा बाजार है, जिसमें रूस, कजाकिस्तान, बेलारूस, आर्मेनिया और किर्गिस्तान शामिल हैं. दोनों पक्षों ने पिछले साल एक समझौते के लिए जरूरी शर्तों पर दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे. इसका लक्ष्य अगले 18-24 महीनों में बातचीत पूरी करना है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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