नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि भारत को नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान आयोजित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के नौवें सत्र में लगातार तीसरी बार इसका अध्यक्ष चुना गया।
जोशी ने शिखर सम्मेलन के दौरान संवाददाताओं से कहा, ‘‘आईएसए के नौवें सत्र में हमने एक बुनियादी विश्वास को फिर दोहराया है कि प्रगति तभी सार्थक होती है, जब उसका लाभ सभी को मिले।’’
उन्होंने फ्रांस को आईएसए का सह-अध्यक्ष दोबारा चुने जाने पर बधाई दी।
जोशी ने कहा, ‘‘सभी सदस्य देशों ने भारत पर भरोसा जताया और लगातार तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का अध्यक्ष चुना है। इसके लिए भारत सरकार की ओर से मैं सभी सदस्य देशों का आभार जताता हूं।’’
जोशी ने अंतरराष्ट्रीय सौर सहयोग को आगे बढ़ाने और प्रगति का लाभ समान रूप से सभी तक पहुंचाने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि भारत ‘सशक्त बनाने के लिए ऊर्जा’ के दृष्टिकोण और ‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’ के सिद्धांत के तहत अंतरराष्ट्रीय सौर सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जोशी ने कहा कि इसी विश्वास ने 2015 में भारत और फ्रांस को मिलकर अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना के लिए प्रेरित किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘आज आईएसए के 130 हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देशों के साथ यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक सशक्त मंच बन चुका है। खासकर वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए यह महत्वपूर्ण है।’’’
चार दिवसीय भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो नवंबर को किया था। यह पांच नवंबर को संपन्न होगा।
जोशी ने कहा कि पिछले दो दिन और अगले दो दिन में होने वाली चर्चाओं के जरिये सौर ऊर्जा से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को निवेश में, साझेदारियों को परियोजनाओं में और महत्वाकांक्षाओं को ठोस परिणामों में बदलने पर जोर दिया जाएगा।
मंत्री ने गठबंधन की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए उन क्षेत्रों में वित्तपोषण उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है, जहां इसकी सबसे अधिक जरूरत है।
उन्होंने कहा कि 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर की अफ्रीका सौर सुविधा अफ्रीका के विकेंद्रित नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के नए रास्ते खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भारत ने करीब 225 करोड़ रुपये (2.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर) देने की प्रतिबद्धता जताकर वंचित समुदायों को सस्ती सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने के अपने संकल्प को और पुख्ता किया है।
उन्होंने कहा कि 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नाइजीरिया विकेंद्रित नवीकरणीय ऊर्जा कोष पूरे अफ्रीका में इस पहल का विस्तार करने का एक मॉडल प्रस्तुत करता है।
जोशी ने सौर ऊर्जा के जीवन में बदलाव लाने की भूमिका पर जोर देते हुए बड़े पैमाने पर समाधान उपलब्ध कराने के महत्व का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि फिजी, मेडागास्कर, कोमोरोस और सेशेल्स में आईएसए के समर्थन से चल रहे कार्यक्रम बताते हैं कि सौर ऊर्जा स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों को बिजली उपलब्ध कराने, स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने तथा कृषि उत्पादों के शीत भंडारण में मदद करके लोगों की आजीविका और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता को मजबूत कर सकती है।
उन्होंने कहा कि गठबंधन मॉरीशस से शुरुआत करते हुए सौर ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के लिए मॉडल तैयार करना है।
मंत्री ने सौर ऊर्जा के जरिये 30 लाख किसानों को सशक्त बनाने और कृषि-फोटोवोल्टिक (एग्री-पीवी) के विस्तार के महत्व का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारत की पीएम-कुसुम योजना ने दिखाया है कि सौर ऊर्जा से चलने वाली कृषि व्यवस्था सिंचाई की लागत घटाने और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने में मदद कर सकती है।
आईएसए के माध्यम से इस मॉडल को सदस्य देशों, विशेषकर अफ्रीका के देशों में अपनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि ऊर्जा बदलाव की प्रक्रिया में किसानों को केंद्र में रखा जा सके।
प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच स्वच्छ ऊर्जा के बढ़ते महत्व का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि कृत्रिम मेधा जिस तरह अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही है, उसे देखते हुए सस्ती, भरोसेमंद और स्वच्छ बिजली तक पहुंच रणनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
जोशी ने कहा कि गठबंधन के इस सत्र का संदेश स्पष्ट है कि सौर ऊर्जा का भविष्य साझा जिम्मेदारी, निरंतर निवेश और सामूहिक प्रयासों के जरिये ही बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत के नए कार्यकाल में निवेश जुटाने, सौर ऊर्जा के विस्तार में तेजी लाने और सामूहिक महत्वाकांक्षाओं को समुदायों तथा देशों के लिए ठोस परिणामों में बदलने पर ध्यान दिया जाएगा।
जोशी ने सभी सदस्य देशों के निरंतर विश्वास और सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी, आईएसए के महानिदेशक आशीष खन्ना, फ्रांस के पर्यावरण मामलों के मंत्री मैथ्यू लेफेव्र, डेनमार्क के व्यापार एवं प्रतिस्पर्धा मामलों के मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड, सूरीनाम के प्राकृतिक संसाधन मंत्री डेविड अबियामोफो, सेशेल्स की उद्योग एवं उद्यम मंत्री गेराल्डा डेसाउबिन और श्रीलंका के ऊर्जा उप मंत्री मुहम्मद अरकम इलियास भी मौजूद थे।
भाषा रमण अजय
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