नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में सोमवार को कहा गया कि 2026 के अंत में चरम पर पहुंचने की संभावना वाले तेज होते ‘अल नीनो’ के कारण घरेलू खाद्य मुद्रास्फीति और आगामी रबी फसलों पर सतर्क नजरिया रखने की जरूरत है।
रिपोर्ट के मुताबिक विशेष रूप से गेहूं और सरसों सहित कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
वित्त मंत्रालय की ‘मासिक आर्थिक समीक्षा’ (एमईआर) ने बाहरी माहौल को अनिश्चितता का प्रमुख स्रोत बताया और कहा कि आगे चलकर तीन वैश्विक घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखने की आवश्यकता है। इनमें दुनिया भर में सॉवरेन बॉन्ड बाजार, इलेक्ट्रॉनिक सामानों तथा खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों के कारण वैश्विक औसत मुद्रास्फीति दर में संभावित वृद्धि, और विकसित देशों सहित दुनिया भर से आने वाली निवेश पूंजी शामिल है।
अगस्त माह के लिए जारी एमईआर में कहा गया, ”घरेलू अर्थव्यवस्था ने समीक्षाधीन महीने के दौरान अपनी मजबूती बरकरार रखी। घरेलू मांग मजबूत बनी रही, जबकि बाहरी क्षेत्र स्थिर रहा। हालांकि, आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों, मौसम की स्थिति और वैश्विक अनिश्चितताओं पर बारीकी से नजर रखनी होगी।”
इसमें कहा गया कि वृद्धि दर, तेल की कीमतों और अलग-अलग ब्याज दर नीतियों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चित बनी हुई है। इन बाहरी जोखिमों के बावजूद, भारत की आर्थिक गतिविधि, मुद्रास्फीति और बाहरी स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर रही है।
घरेलू आर्थिक गतिविधि स्थिर बनी हुई है, जहां विस्तार की गति में कुछ नरमी के बीच लचीली घरेलू मांग से इसे सहारा मिल रहा है। सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सात प्रतिशत के अनुमान से अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भविष्य में लागत का दवाब घटने और मांग की मजबूत स्थितियों से आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिल सकता है, हालांकि बाहरी माहौल को लेकर अनिश्चितता है।
एमईआर ने कहा कि अल नीनो की स्थितियों के उभरने और उनके बने रहने के चलते बारिश, फसलों के परिणामों और खाद्य मुद्रास्फीति पर इसके प्रभावों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
भाषा पाण्डेय योगेश
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