मुंबई, 16 अगस्त (भाषा) विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारियों का बड़ी संख्या में मानना है कि कार्यस्थल पर कर्मचारियों के कल्याण से जुड़ी नीतियों का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं होने से तनाव का स्तर बढ़ रहा है। यह स्थिति औपचारिक नीति और कर्मचारियों के वास्तविक अनुभवों के बीच व्यापक अंतर को दर्शाती है। रविवार को जारी एक रिपोर्ट में यह कहा गया।
‘बियॉन्ड द पॉलिसी: लिव्ड एक्सपीरियंस एंड माइक्रो-रिचुअल्स इन एम्प्लॉयी वेलबीइंग’ नामक रिपोर्ट के अनुसार 42 प्रतिशत कर्मचारियों का मानना है कि उनके नियोक्ताओं के पास कर्मचारियों के कल्याण की नीति होने के बावजूद उसका प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।
कार्यबल समाधान और मानव संसाधन सेवा प्रदाता जीनियस एचआरटेक और बाजार अनुसंधान कंपनी डिजीपोल की यह रिपोर्ट विभिन्न क्षेत्रों के 1,884 कर्मचारियों के मिले उत्तरों पर आधारित है। इनमें सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, वित्त एवं बीमा और आतिथ्य सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं। ऑनलाइन सर्वेक्षण एक जुलाई से तीन अगस्त, 2026 के बीच हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, 21 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि कल्याण की भावना उनके रोजमर्रा के कार्य-संस्कृति का हिस्सा है। वहीं, 42 प्रतिशत ने कहा कि अच्छी नीतियां मौजूद हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन अलग-अलग स्तर पर होता है। इससे पता चलता है कि नीतियों का सही क्रियान्वयन संगठनों के लिए एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया कि लगातार काम करते रहने की संस्कृति से पैदा होने वाला दबाव भी तनाव का प्रमुख कारण है। 42 प्रतिशत कर्मचारियों ने हर समय उपलब्ध रहने की मांग को कार्यस्थल पर तनाव का सबसे बड़ा स्रोत बताया।
इसके बाद 21 प्रतिशत कर्मचारियों ने अवास्तविक समयसीमा और अपेक्षाओं को तनाव का कारण बताया। वहीं, 52 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि भरोसा और अधिकार मिलने से कार्यस्थल पर उनके कल्याण की भावना सबसे अधिक मजबूत होती है।
रिपोर्ट के अनुसार, दखल देने वाली कार्यसंस्कृति, अत्यधिक निगरानी और प्रबंधकीय स्तर पर अपमानजनक व्यवहार समस्याएं पैदा करते हैं, जबकि स्वायत्तता और भरोसा कार्यस्थल के तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि प्रबंधकों का व्यवहार कर्मचारियों के कल्याण को प्रभावित करने वाले सबसे प्रमुख कारकों में शामिल है। 47 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि अधिक संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण प्रबंधकों की मौजूदगी से उन्हें कार्यस्थल पर तनाव या अत्यधिक थकान के बारे में बात करने में अधिक सहजता महसूस होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, इससे कर्मचारियों के मानसिक रूप से सुरक्षित कार्यस्थल के निर्माण में नेतृत्व के व्यवहार के महत्व का पता चलता है।
कर्मचारियों के योगदान और उनकी प्रतिक्रिया को मान्यता देना भी कार्यस्थल पर कल्याण की भावना बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कारक है। 37 प्रतिशत कर्मचारियों ने इसे ऐसा प्रबंधकीय कदम बताया, जिसका सबसे सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
जीनियस एचआरटेक के चेयरमैन आर पी यादव ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘कर्मचारियों के कल्याण को केवल नीति दस्तावेज या सालाना पहल के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह रोजमर्रा की बातचीत, प्रबंधकों के संवाद के तरीके, कर्मचारियों को मिलने वाले भरोसे, उनके योगदान की सराहना और चुनौतियों के बारे में सुरक्षित माहौल में बात कर पाने से महसूस होता है। निष्कर्ष इस बात को रेखांकित करते हैं कि संगठनों को केवल कल्याण नीतियां बनाने से आगे बढ़कर ऐसी कार्यसंस्कृति तैयार करने की जरूरत है, जहां इन नीतियों का वास्तविक रूप से पालन हो।’’
भाषा योगेश पाण्डेय
पाण्डेय
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