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Saturday, 25 April, 2026
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बजट में उत्पादन बढ़ाने की घोषणा के बावजूद तेल-तिलहन कीमतों में मिला-जुला रुख

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नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) संसद में पेश आम बजट में तिलहन उत्पादन बढ़ाने की सरकार की घोषणा के बावजूद देश के तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को कारोबार पर कोई विशेष असर नहीं दिखा। एक ओर जहां सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल और बिनौला तेल के दाम सुधार दर्शाते बंद हुए, वहीं मूंगफली तिलहन के दाम में गिरावट दर्ज हुई।

बिनौला खल का वायदा दाम टूटने के कारण बाजार की कारोबारी धारणा निराशाजनक रहने के बीच मूंगफली तेल, सोयाबीन तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।

बाजार सूत्रों ने कहा कि अगले साल की सरसों फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि की घोषणा की उम्मीद और मंडियों में आवक घटने के कारण सरसों तेल-तिलहन कीमतों में सुधार देखा गया।

उन्होंने कहा कि कल रात सरकार ने सोयाबीन डीगम के आयात शुल्क में 105 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। दूसरी ओर सीपीओ पर आयात शुल्क को 67 रुपये प्रति क्विंटल और पामोलीन पर 87 रुपये प्रति क्विंटल की कमी की गई है।

सोयाबीन के आयात शुल्क में वृद्धि और कल रात शिकॉगो एक्सचेंज में तेजी रहने के कारण सोयाबीन तेल कीमत में मजबूती रही। दूसरी ओर डी-आयल्ड केक (डीओसी) के कमजोर उठाव की वजह से सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्ववत बने रहे। सोयाबीन तिलहन भी बाजार में औने-पौने दाम पर बिक रहा है।

सूत्रों ने कहा कि मौजूदा समय में आयात होने वाले खाद्य तेलों में सबसे सस्ता सोयाबीन तेल है। धन की कमी से जूझ रहे आयातक इसे आयात लागत से भी कम, औने-पौने दाम पर बेच रहे हैं। ऊंचा भाव होने की वजह से पाम, पामोलीन का कारोबार कमजोर है। दाम ऊंचा रहने से सूरजमुखी तेल का भी कम आयात हो रहा है। पाम, पामोलीन का भाव इतना ऊंचा है कि इसके आगे देश में मांग में रहने वाला सरसों तेल का दाम भी पाम, पामोलीन से नीचे हो गया है। खाद्य तेलों की इस कमी को सबसे सस्ते सोयाबीन तेल द्वारा पूरा करना मुश्किल ही है।

उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में कपास की आवक घटकर महज चार हजार गांठ रह गई। बिनौला खल का वायदा दाम टूटने के बीच बिनौला तेल के दाम में सुधार आया। इसी बिनौला खल का दाम टूटने और कारोबारी धारणा बिगड़ने के कारण मूंगफली खल के कमजोर उठाव के बीच मूंगफली तिलहन के दाम गिरावट के साथ बंद हुए। तिलहन का दाम टूटने के कारण मूंगफली तेल पूर्वस्तर पर बना रहा।

सूत्रों ने कहा कि बजट भाषण में सरकार ने तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाने की मंशा जाहिर की है लेकिन उसे मौजूदा इस तथ्य को ध्यान में रखकर सोचना चाहिये कि सबकी मौजूदगी में भी सट्टेबाज किस तरह वायदा कारोबार को, अपने नापाक कारोबारी हथकंडों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बार कपास का उत्पादन कम रहने के बावजूद वायदा कारोबार में बिनौला खल का दाम नीचे चलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मूंगफली का एमएसपी 6,860 रुपये क्विंटल है और मिलावटी बिनौला खल का कारोबार बढ़ने के बीच बाजार की कारोबारी धारणा बिगड़ने से मूंगफली का हाजिर भाव 5,000-5,300 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। यह स्थिति तो मूंगफली उत्पादन को प्रभावित करेगी।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,050-6,150 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 5,300-5,625 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 13,950 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,115-2,415 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,240-2,340 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,240-2,365 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,250 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 12,150 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,450 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 12,700 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 4,225-4,275 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 3,925-4,025 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अनुराग अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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