नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) अगली स्पेक्ट्रम नीलामी से पहले दूरसंचार उद्योग निकाय सीओएआई ने सरकार से बोली की कीमतों को कम करने का आग्रह किया है। निकाय का कहना है कि सेवा प्रदाता अभी तक 5जी बुनियादी ढांचे में किए गए अपने भारी निवेश की वसूली नहीं कर पाए हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
हाल में आयोजित ‘सीओएआई डिजीकॉम शिखर सम्मेलन’ के मौके पर पीटीआई-भाषा से सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक एस पी कोचर ने कहा कि उद्योग को उम्मीद है कि सरकार दूरसंचार परिचालकों द्वारा 5जी में किए गए विशाल निवेश पर विचार करेगी, जिस पर अभी तक कोई प्रतिफल नहीं मिला है।
कोचर ने कहा, ”मुझे उम्मीद है कि स्पेक्ट्रम की कीमतें कम होंगी क्योंकि 5जी में बिना किसी आरओआई के बहुत अधिक पूंजी लगाई गई है। जब तक हमें प्रतिफल मिलना शुरू नहीं होता, तब तक बहुत महंगे स्पेक्ट्रम में निवेश को व्यवसाय की दृष्टि से लागत प्रभावी मानना कठिन होगा। स्पेक्ट्रम का उपयोग केवल नीलामी से खरीदकर नहीं किया जा सकता, बल्कि इसे बड़े निवेश के साथ उपयोग के योग्य बनाना पड़ता है।”
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने फरवरी में सिफारिश की थी कि सरकार 600 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज, 2500 मेगाहर्ट्ज, 3300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज के फ्रीक्वेंसी बैंड में उपलब्ध पूरे 11,790 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को नीलामी के लिए रखे।
कम फ्रीक्वेंसी वाले स्पेक्ट्रम व्यापक कवरेज देते हैं। सरकार 600 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम की नीलामी पर विचार कर रही है, जिससे इमारतों के भीतर मोबाइल नेटवर्क कवरेज में सुधार होने की उम्मीद है।
भाषा पाण्डेय
पाण्डेय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.