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Sunday, 26 April, 2026
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कैग ने ‘डिजिटल भारत निधि’ को एयरटेल से 8.49 करोड़ रुपये जुर्माना वसूलने को कहा

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नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने एक रिपोर्ट में कहा है कि दूरसंचार विभाग के तहत संचालित ‘डिजिटल भारत निधि’ (डीबीएन) को समय पर काम न करने या शर्तें पूरी न करने पर भारती एयरटेल से 8.49 करोड़ रुपये का जुर्माना जल्द वसूलना चाहिए।

संसद में बृहस्पतिवार को पेश रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण टेलीकॉम विकास कोष डीबीएन ने दिसंबर, 2017 में असम और सिक्किम में मोबाइल कवरेज उपलब्ध कराने के लिए एयरटेल के साथ समझौता किया था। इसके तहत सभी टावर स्थलों को जून, 2019 तक चालू किया जाना था लेकिन कई बार समय-सीमा बढ़ाने के बावजूद कई जगहों पर अभी तक ये टावर नहीं लग पाए हैं।

कैग रिपोर्ट कहती है, “डीबीएन को लंबित मोबाइल टावर स्थलों को शीघ्र चालू कराने और एयरटेल से बकाया जुर्माने (एलडी और एनपीपी) की वसूली सुनिश्चित करनी चाहिए।”

लिक्विडेटेड डैमेज (एलडी) के तहत यदि कोई कंपनी तय समयसीमा के भीतर परियोजना पूरी नहीं करती है, तो उस पर अनुबंध में पहले से तय जुर्माना लगाया जाता है। वहीं, नॉन-परफॉर्मेंस पेनल्टी (एनपीपी) निर्धारित मानकों या शर्तों के अनुरूप काम नहीं होने पर कंपनी पर अलग से लगा जुर्माना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल, 2021 तक स्वीकृत 756 टावर स्थलों में से केवल 431 स्थल ही चालू हो पाए थे। बाद में डीबीएन ने लक्ष्य को संशोधित कर 562 स्थल किया, लेकिन अप्रैल, 2025 तक भी 124 स्थल चालू नहीं हो सके।

कैग ने कहा कि इस देरी के कारण एयरटेल पर कुल 19.47 करोड़ रुपये का एलडी और एनपीपी बनता है। इसमें से डीबीएन ने अब तक केवल 10.98 करोड़ रुपये ही वसूले हैं, जबकि 8.49 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, रोल-आउट अवधि समाप्त होने के चार साल बाद भी वसूली लंबित रहना और परियोजना में लगातार देरी अनुबंध प्रवर्तन में कमजोरी को दर्शाता है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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