नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव 2026 के लिए नियम और आचार संहिता जारी कर दी है. विश्वविद्यालय ने चुनाव प्रचार में प्रिंटेड पोस्टर, बैनर और अन्य प्रचार सामग्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है.
गुरुवार को विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. मनोज कुमार सिंह ने डूसू के पदाधिकारियों और विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. इस दौरान उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट और लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनाव कराने के नियमों की जानकारी दी गई.
विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, कैंपस और उसके आसपास किसी भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं होगी. बिजली के खंभों या अन्य जगहों पर प्रिंटेड या डिजिटल होर्डिंग, पोस्टर और बैनर लगाने पर रोक रहेगी.
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि प्रिंटेड प्रचार सामग्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. केवल ‘वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ पर हाथ से बने पोस्टर लगाने की अनुमति होगी. इन दीवारों पर ब्लॉक प्रिंटिंग या स्प्रे पेंटिंग भी नहीं की जा सकेगी.
इसके अलावा, MCD के विज्ञापन बोर्ड पर किसी भी तरह का फ्लेक्स पोस्टर लगाने की अनुमति नहीं होगी. यदि ऐसा पाया जाता है तो प्रॉक्टर कार्यालय इस संबंध में MCD आयुक्त को कार्रवाई के लिए पत्र लिखेगा.
विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि कार, जीप, बस, ऑटो या ई-रिक्शा समेत किसी भी वाहन पर उम्मीदवार के नाम वाले स्टिकर नहीं लगाए जा सकेंगे.
हर उम्मीदवार को चुनाव प्रचार के लिए अधिकतम पांच कारों के इस्तेमाल की अनुमति होगी. ट्रैक्टर, JCB या जानवरों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. काले शीशों वाली (टिंटेड) या बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के इस्तेमाल की भी अनुमति नहीं होगी.
यदि विश्वविद्यालय परिसर में कोई अनधिकृत वाहन खड़ा पाया गया तो ट्रैफिक पुलिस के नियमों के अनुसार उसका चालान किया जाएगा या उसे टो कर हटाया जाएगा.
उम्मीदवार अपने नाम वाले उपहार, स्मृति-चिह्न, कैनोपी या छाते भी वितरित नहीं कर सकेंगे. यदि ऐसा कोई सामान मिला तो उम्मीदवार का नामांकन रद्द किया जा सकता है.
प्रॉक्टर ने कहा कि जनसभा या सार्वजनिक बैठक करने से पहले प्रॉक्टर कार्यालय को इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा, ताकि कैंपस में जाम, अव्यवस्था या कार्यक्रमों के टकराव से बचा जा सके.
चुनाव प्रचार के दौरान हर कॉलेज में केवल पांच छात्र ही प्रचार के लिए जा सकेंगे. वहीं, महिला कॉलेजों के छात्रावासों में केवल छात्राओं को ही प्रचार की अनुमति होगी.
बैठक में सभी छात्र संगठनों ने इन नियमों का पालन करने और विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया. विश्वविद्यालय ने कहा कि यह आचार संहिता कॉलेजों को भी भेजी जाएगी.