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Wednesday, 7 October, 2026
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मीडिया का अनादर, नागरिकों का ‘अनादर’ करने के समान: प्रकाश राज

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चेन्नई, सात अक्टूबर (भाषा) अभिनेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने मीडिया के सवालों से बचने वाले राजनीतिक नेताओं पर तीखा हमला करते हुए कहा कि संवाददाता सम्मेलन से बचना उन नागरिकों का ‘अनादर’ करना है, जिनके सवाल पत्रकार उनके सामने रखते हैं।

राज ने छह अक्टूबर को यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, लेकिन जन-केंद्रित राजनीति में उनकी रुचि है। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों से राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने और निर्वाचित प्रतिनिधियों से शासन चलाने की अपेक्षा करता है।

उन्होंने सत्तारूढ़ दलों पर पारदर्शिता से बचने और सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों के लिए लोकतांत्रिक स्थान नहीं देने का आरोप लगाते हुए सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही की मांग की।

राज ने कहा, ‘‘आप संवाददाता सम्मेलन करने से क्यों बच रहे हैं? आप प्रेस का अनादर और उसे नीचा क्यों दिखा रहे हैं?’’ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री, निर्वाचित नेताओं का कर्तव्य है कि वे जनता की ओर से मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दें।

राज ने चुनावी प्रक्रिया की शुचिता को लेकर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार की भी आलोचना की।

उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि चयन समिति में भारत के प्रधान न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल किए जाने से सत्तारूढ़ दल के पक्ष में 2:1 का बहुमत हो गया।

उन्होंने ऐसे कानूनी प्रावधानों की भी आलोचना की, जिनके तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त को अपने कार्यकाल के दौरान या उसके बाद कानूनी कार्रवाई से व्यापक न्यायिक संरक्षण मिलता है।

राज ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में व्यापक खामियों का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि आधिकारिक दौरे के दौरान काम, अस्पताल या घर से बाहर होने के कारण मौजूद नहीं रहने वाले नागरिकों के नाम ‘‘अनुपस्थित’’ या ‘‘स्थानांतरित’’ जैसे दर्जों के आधार पर मनमाने ढंग से मतदाता सूची से हटा दिए गए।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण और जन-जागरूकता अभियानों की कमी के बीच प्रशासनिक दबाव के कारण बूथ स्तर के अधिकारियों ने आत्महत्या की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने कथित विदेशी घुसपैठियों की जानकारी देने संबंधी उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी की और आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले प्रधानमंत्री की चुनावी घोषणाओं के लिए मतदान कार्यक्रम में बदलाव किया।

भाषा नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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