इंफाल, 15 अक्टूबर (भाषा) मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने बृहस्पतिवार को कहा कि जब तक लोग आपसी समझ विकसित नहीं करेंगे तथा बातचीत के जरिए अपने मतभेदों को नहीं सुलझाएंगे तब तक राज्य में जातीय हिंसा को केवल सरकारी प्रयासों और सुरक्षा उपायों से खत्म नहीं किया जा सकता ।
कोंथौजाम ने यह टिप्पणी तब की, जब वे इंफाल के क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में भर्ती सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के 84 जवानों से मिलने गए थे, जिन्हें खाद्य विषाक्तता के संदेह में वहां भर्ती कराया गया था।
राज्य में उग्रवादियों द्वारा कथित तौर पर की गई हत्याओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “जब आम लोगों में इंसानियत ही न हो, तो एक-दूसरे को मारने से कोई नहीं रोक सकता। हमें यह बात समझनी चाहिए।”
उन्होंने कहा, “हमें एक सभ्य समाज बनना चाहिए। सरकार सब कुछ नहीं कर सकती, हालांकि वह हिंसा को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रही है। हर बात आपसी समझ से सुलझाई जानी चाहिए। हिंसा या हत्या से कभी किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता। हमें एक-दूसरे से बात करनी चाहिए और सभी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए।”
मंत्री ने कहा कि सरकार बातचीत शुरू करने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांति बहाल करने में समाज और लोगों की भी भूमिका है।
उन्होंने कहा, “केवल सुरक्षा से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। हमें, यानी समाज और लोगों को, किसी भी तरह के गुस्से पर काबू पाने की कोशिश करनी चाहिए।”
यह पूछे जाने पर कि क्या ‘अभियान निलंबन’ (एसओओ) समझौते के दायरे में आने वाले उग्रवादियों को गिरफ्तार किया जा सकता है, कोंथौजम ने कहा कि गंभीर अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लिया जा सकता है।
रिम्स में भर्ती बीएसएफ जवानों की हालत के बारे में उन्होंने बताया कि सुबह करीब 8.30 बजे नाश्ते में ‘पूरी-सब्जी’ खाने के बाद उन्हें उल्टी होने लगी।
उन्होंने बताया कि उनका रक्तचाप गिर गया था और कुल 84 कर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति को छोड़कर बाकी सभी की हालत स्थिर है, जबकि उस एक व्यक्ति को निगरानी में रखा गया है।
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