नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में लोकतंत्र मजबूत है और इसके संवाद तथा स्वतंत्र अभिव्यक्ति की व्यवस्था से दुनिया के अन्य देश लाभ उठा सकते हैं।
बिरला ने यह टिप्पणी 26 और 27 अक्टूबर को संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित होने वाले 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के बारे में जानकारी देते हुए की।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारी कोशिश होगी कि भारत में जिस तरह का लोकतंत्र है, जिस तरह से संवाद और स्वतंत्र अभिव्यक्ति की हमारी व्यवस्था है, उसके अनुभव का लाभ दुनिया ले।’’
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और पिछले 75 वर्षों में देश ने अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया है तथा इसी वजह से दुनिया की भारत से अपेक्षाएं हैं।
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन भारत के संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय है और इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों और भागीदार देशों के पीठासीन अधिकारी एवं संसदीय नेता, केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राज्य विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारी, सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।
बिरला ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन में उपस्थित रहेंगे और विभिन्न देशों से आए शिष्टमंडलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान आगंतुक शिष्टमंडलों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संवाद होगा। 25 अक्टूबर को 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम के संयुक्त वक्तव्य को अंतिम रूप देने के लिए शिष्टमंडलों के सचिवों की बैठक होगी।
बिरला ने बताया कि संसदीय फोरम का मुख्य विषय ‘‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों का सुदृढ़ीकरण’’ है। इसके तहत चार उच्च-स्तरीय सत्रों में आम सहमति आधारित संवाद होगा।
उन्होंने कहा कि पहले सत्र में बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के लिए संस्थाओं को मजबूत करने में संसदों की भूमिका, दूसरे में संसदों के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में मानव-केंद्रित नवोन्मेष को बढ़ावा देने, तीसरे में संसदीय सहयोग के जरिए अधिक प्रतिनिधिक वैश्विक शासन व्यवस्था सुनिश्चित करने और चौथे में सतत एवं समावेशी भविष्य सुनिश्चित करने में संसदों की भूमिका पर चर्चा होगी।
उन्होंने बताया कि क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर चर्चा के लिए ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों की संसदों की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समितियों के अध्यक्षों की एक विशेष बैठक भी होगी।
बिरला ने कहा कि सम्मेलन में उच्च-स्तरीय पूर्ण सत्रों, समानांतर बैठकों और द्विपक्षीय संवाद के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। उपराष्ट्रपति गणमान्य अतिथियों के सम्मान में भोज का आयोजन करेंगे। शिष्टमंडल भारत की संसद का दौरा करने के साथ दिल्ली में सांस्कृतिक भ्रमण भी करेंगे।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन का समापन 27 अक्टूबर को होगा।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत ने अब तक 64 देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह बनाए हैं और अब इसका विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि संसदीय मैत्री समूहों के माध्यम से विभिन्न देशों के साथ भारत के संसदीय संबंधों को और मजबूत किया जा रहा है।
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