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Sunday, 18 January, 2026
होमदेशप्रदूषण नियंत्रण के कड़े उपायों के दूसरे दिन भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में

प्रदूषण नियंत्रण के कड़े उपायों के दूसरे दिन भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में

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नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (भाषा) दिल्ली की वायु गुणवत्ता शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रही और कल तक इसके ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचने का अनुमान है। वहीं, शहर में ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ अभियान के दूसरे दिन प्रदूषण नियंत्रण केंद्रों के बाहर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं।

वायु प्रदूषण के बिगड़ते हालात से निपटने के लिए यहां अधिकारियों ने बीएस-6 मानक से नीचे वाले गैर-दिल्ली निजी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है और ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नियम को सख्ती से लागू किया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में प्रवर्तन टीमों ने प्रदूषण फैलाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 11,776 चालान जारी किए हैं।

इसके बावजूद, 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ‘बहुत खराब’ श्रेणी में 374 दर्ज किया गया, जो एक दिन पहले दर्ज 373 से थोड़ा अधिक है।

शहर के 40 निगरानी केंद्रों में से 11 केंद्रों पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि 29 केंद्रों पर एक्यूआई ‘बहुत खराब’ स्तर पर रहा।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ‘समीर’ ऐप के आंकड़ों के अनुसार, आनंद विहार में सर्वाधिक एक्यूआई 430 दर्ज किया गया।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार ने प्रवर्तन, धूल नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और वाहन नियमन को मिलाकर बहु-क्षेत्रीय रणनीति अपनाई है, जिससे पिछले वर्षों की तुलना में वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।

प्रदूषण-रोधी अभियान के तहत बृहस्पतिवार रात आठ बजे से शुक्रवार सुबह आठ बजे तक राजधानी के सीमावर्ती प्रवेश बिंदुओं पर 5,037 वाहनों की जांच की गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे बीएस-6 मानकों पर खरे उतरते हैं। इस दौरान 419 वाहनों को वापस लौटाया गया, जबकि 374 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बृहस्पतिवार सुबह छह बजे से शुक्रवार सुबह छह बजे के बीच करीब 2,800 वाहन बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के पाए गए।

इस बीच, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में दिल्ली में विभिन्न नागरिक और प्रवर्तन एजेंसियों के पास प्रदूषण से जुड़ी लगभग एक लाख शिकायतें दर्ज की गई हैं।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा ग्रीन दिल्ली ऐप से संकलित आंकड़ों के अनुसार, 18 दिसंबर की सुबह 11 बजे तक कुल 99,435 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 86,984 का निपटारा हो चुका है, जबकि 12,451 शिकायतें लंबित हैं।

पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने के लिए पीयूसी प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने के एक दिन बाद यात्रियों में जागरूकता बढ़ती नजर आई। कई लोग बिना पूछे ही अपने दस्तावेज दिखाते नजर आए।

दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष निश्चल सिंघानिया ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पीयूसी केंद्रों पर भीड़ में कोई खास बदलाव नहीं आया है, हालांकि सीमावर्ती इलाकों में ईंधन बिक्री पर असर पड़ा है।

उन्होंने कहा, “पहले इस बात को लेकर असमंजस था कि ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नियम कब तक लागू रहेगा। अब स्पष्ट है कि यह जीआरएपी-चार लागू रहने तक जारी रहेगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में ईंधन बिक्री घटी है।’’

हालांकि, उन्होंने अनुपालन में सुधार की बात कही।

सिंघानिया ने कहा, ‘‘ग्राहक खुद ही पीयूसी प्रमाणपत्र निकालकर दिखा रहे हैं, यह एक सकारात्मक संकेत है।’’

वहीं, पूरे शहर में जांच एक समान रूप से लागू नहीं की गई। यात्रियों ने बताया कि कुछ पेट्रोल पंपों पर शुक्रवार को कोई सत्यापन नहीं किया गया।

रोहतक रोड स्थित एक पेट्रोल पंप पर वाहन में ईंधन भरवाने आए एक व्यक्ति ने बताया कि उनसे पीयूसी प्रमाणपत्र नहीं मांगा गया और वहां कोई पुलिस या प्रवर्तन कर्मी मौजूद नहीं था।

गुलाबी बाग से अपने कार्यस्थल जा रहे भूषण सिंह ने कहा कि जिस पेट्रोल पंप पर वे गए, वहां स्थिति “सामान्य दिनों जैसी” ही थी।

भाषा राखी शफीक

शफीक

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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