नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) का समग्र स्कोर सुधरने के बावजूद वह ‘क्यूएस एशिया विश्वविद्यालय रैंकिंग 2027’ में 11 पायदान फिसलकर 106वें स्थान पर पहुंच गया है। विश्वविद्यालय द्वारा बुधवार को जारी तुलनात्मक प्रदर्शन मूल्यांकन में यह जानकारी दी गई।
विश्वविद्यालय का समग्र स्कोर 2026 के 68.5 से बढ़कर 2027 में 70 हो गया है, जबकि क्षेत्रीय रैंकिंग में उसका स्थान 95वें से गिरकर 106वें पायदान पर आ गया। हालांकि, उससे नीचे रहने वाले संस्थानों का अनुपात लगभग पहले जैसा ही रहा जो पिछले साल के 93.8 प्रतिशत की तुलना में इस बार 93.9 प्रतिशत दर्ज किया गया।
मूल्यांकन में शामिल 11 मानदंडों में से नौ में विश्वविद्यालय के स्कोर में सुधार दर्ज किया गया। इनमें अंतरराष्ट्रीय छात्र अनुपात, प्रति शिक्षक शोधपत्रों की संख्या और अंतरराष्ट्रीय शिक्षक अनुपात में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई।
मूल्यांकन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय छात्र अनुपात का स्कोर 9.2 से बढ़कर 16.8 हो गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय शिक्षक अनुपात का स्कोर 3.4 से बढ़कर 9.2 पर पहुंच गया। वहीं, प्रति शिक्षक शोधपत्रों के मामले में स्कोर 87.7 से बढ़कर 95 हो गया।
विश्वविद्यालय ने प्रति शोधपत्र उद्धरणों के मामले में भी सुधार दर्ज किया है। इस मानदंड पर उसका स्कोर 19.5 से बढ़कर 24.6 हो गया। इसके अलावा, पीएचडी उपाधि प्राप्त शिक्षकों और कर्मचारियों से संबंधित मानदंड पर भी स्कोर 94.7 से बढ़कर 99.4 हो गया।
नियोक्ताओं के बीच प्रतिष्ठा के मानदंड पर विश्वविद्यालय का स्कोर 86.1 से बढ़कर 88.6 हो गया, जबकि शिक्षक-छात्र अनुपात के मामले में यह 15.1 से बढ़कर 16.3 पर पहुंच गया।
हालांकि, शैक्षणिक प्रतिष्ठा का स्कोर 91.1 से मामूली रूप से घटकर 90.8 रह गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान नेटवर्क के मामले में यह 99.4 से घटकर 99.3 हो गया।
विशिष्ट मानदंडों की रैंकिंग में विश्वविद्यालय ने प्रति शिक्षक शोधपत्रों के मामले में 17 पायदान का सुधार करते हुए 101वां स्थान हासिल किया है। वहीं, पीएचडी उपाधि प्राप्त शिक्षकों और कर्मचारियों के मानदंड में 54 पायदान की छलांग लगाकर वह 118वें स्थान पर पहुंच गया। नियोक्ताओं के बीच प्रतिष्ठा की रैंकिंग में भी तीन पायदान का सुधार हुआ और विश्वविद्यालय 96वें स्थान पर आ गया।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान नेटवर्क की रैंकिंग में विश्वविद्यालय सात पायदान फिसलकर 27वें स्थान पर आ गया, जबकि शैक्षणिक प्रतिष्ठा के मामले में चार स्थान नीचे खिसककर 61वें पायदान पर पहुंच गया।
मूल्यांकन रिपोर्ट में कहा गया है कि शोध कार्यों की उत्पादकता और शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यताएं विश्वविद्यालय की प्रमुख ताकत हैं।
भाषा खारी रंजन
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