नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिका पर शुक्रवार को नोटिस जारी किया. इमाम ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी.
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने अभियोजन पक्ष से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को तय की.
शरजील इमाम की ओर से पेश अधिवक्ता अहमद इब्राहिम ने दलील दी कि 4 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट का दिया गया आदेश कानूनी रूप से सही नहीं है और इसे रद्द किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा शरजील इमाम की पिछली जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है.
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के छह महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद पिछले सात महीनों से मुकदमे की सुनवाई में कोई खास प्रगति नहीं हुई है. अभी तक आरोप तय करने पर ही बहस चल रही है और शरजील इमाम करीब छह साल से जेल में हैं.
याचिका में 22 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसमें सह-आरोपी तस्लीम अहमद को अंतरिम जमानत दी गई थी. साथ ही UAPA की धारा 43D(5) की व्याख्या से जुड़े कानूनी सवाल को बड़ी पीठ के पास भेजा गया था.
याचिका के अनुसार, ये नए कानूनी घटनाक्रम और मुकदमे में हो रही देरी, जमानत पर दोबारा विचार करने के लिए पर्याप्त आधार हैं.
याचिका में यह भी कहा गया कि निचली अदालत ने इन नए घटनाक्रमों पर ध्यान नहीं दिया और केवल यह कहते हुए जमानत याचिका सुनने योग्य नहीं मानी कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तें अभी पूरी नहीं हुई हैं.
4 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने शरजील इमाम और सह-आरोपी उमर खालिद की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं.
ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि वह 5 जनवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बंधी हुई है. उस आदेश में कहा गया था कि आरोपी तभी दोबारा जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं, जब अभियोजन पक्ष के सुरक्षित गवाहों की गवाही पूरी हो जाए या एक साल का समय पूरा हो जाए, जो भी पहले हो.
यह मामला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़ा है. फिलहाल अदालत में आरोप तय करने (चार्ज फ्रेम करने) पर बहस चल रही है और अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं.