नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की उस याचिका पर, जिसमें X पर उनके अकाउंट को ब्लॉक करने को चुनौती दी गई थी, दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सरकार और सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांगा. लेकिन साथ ही कोर्ट ने तुरंत अकाउंट बहाल करने से इनकार कर दिया.
21 मई को यह ब्लॉकिंग आदेश सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69A के तहत दिया गया था. यह आदेश इंटेलिजेंस ब्यूरो के इनपुट पर राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से लिया गया था, सरकार ने कहा.
दीपके को इसके बारे में एक पत्र के जरिए जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्हें ब्लॉकिंग का पूरा आदेश अभी तक नहीं मिला है. जस्टिस पी.के. कौड़ाव ने आईटी विभाग की रिव्यू कमेटी को निर्देश दिया कि वह दीपके की याचिका पर सुनवाई करे और मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को तय की गई, जो हाई कोर्ट की छुट्टियों के बाद एक हफ्ता होगा.
आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम 2021 का नियम 14 यह बताता है कि एक अंतर-विभागीय समिति डिजिटल न्यूज मीडिया और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म से जुड़ी शिकायतों पर सुनवाई करेगी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ब्लॉकिंग की सिफारिश करेगी.
अगर जरूरत पड़े तो यह समिति ब्लॉकिंग आदेश को रद्द भी कर सकती है और ट्वीट्स को फिर से लाइव करने का निर्देश दे सकती है, कोर्ट ने कहा.
जस्टिस कौड़ाव ने कहा. “उन्हें दूसरे पक्ष को सुनकर समग्र रूप से देखा जाएगा. इसमें कई गंभीर मुद्दे हैं. इसके व्यापक प्रभाव हैं.” उन्होंने रिव्यू कमेटी को निर्देश दिया कि वह दीपके की शिकायतों की जांच करे.
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत राजनीतिक रणनीतिकार अभिजीत दीपके ने 16 मई को की थी. यह एक दिन पहले चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना पत्रकारिता, सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविज्म करने वालों को “कॉकरोच” और “परजीवी” कहा था.
सीजेपी तेजी से लोकप्रिय हो गई और कुछ ही दिनों में इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हासिल कर लिए, जिससे उसने भारत की बड़ी पार्टियों बीजेपी और कांग्रेस के फॉलोअर्स को भी पीछे छोड़ दिया.
दीपके की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने कहा कि फिलहाल अकाउंट को अनब्लॉक किया जाए और अगर सरकार को कुछ पोस्ट आपत्तिजनक लगती हैं तो उन्हें ब्लॉक रखा जा सकता है.
उन्होंने कहा कि यह पहला ऐसा मामला नहीं है और पहले भी ऐसे तरीके अपनाए गए हैं.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस सुझाव का विरोध किया और कहा कि ऐसा करना केस के मेरिट पर आदेश देने जैसा होगा.
हाई कोर्ट ने इस मामले को पहले के मामलों से अलग बताया, जहां अकाउंट तुरंत बहाल कर दिए गए थे. कोर्ट ने कहा कि पहले मामलों में “कुछ ट्वीट्स आपत्तिजनक हो सकते थे”, लेकिन इस मामले में “पूरी गतिविधि ही आपत्तिजनक हो सकती है”.
कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून अभी “बहुत नया” है और विकसित हो रहा है.
आईटी नियम 2009 के नियम 16 का हवाला देते हुए कोर्ट ने ऑनलाइन कंटेंट ब्लॉक करने से जुड़ी सभी अनुरोधों, शिकायतों और सरकारी कार्रवाइयों की कड़ी गोपनीयता पर चर्चा की. इस नियम के तहत अधिकारियों को बिना बताए या बिना सुनवाई के ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने की अनुमति है.
सिब्बल ने कहा कि उन्होंने कभी X से ब्लॉकिंग आदेश की कॉपी नहीं मांगी, लेकिन कोर्ट को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि दीपके को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति दी जाए और किसी अन्य व्यक्ति को उनकी ओर से पेश होने दिया जाए.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दीपके अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हो सकते हैं और रिव्यू कमेटी को निर्देश दिया कि वह ब्लॉकिंग आदेश की जांच करे और अपनी रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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