गुलफिशा फातिमा का मामला
5 जनवरी के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के पांच दूसरे आरोपियों के लिए अलग रुख अपनाया और उन्हें जमानत दे दी. खालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को 12 शर्तों के साथ जमानत दी.
कोर्ट ने कहा कि इन पांचों की स्थिति बाकी आरोपियों से अलग थी और यह नहीं दिखाया गया था कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए उनका जेल में रहना जरूरी था. लेकिन खालिद और इमाम के मामले में कोर्ट ने पाया कि उनके खिलाफ मौजूद सामग्री UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर रोक लगाती है.
फिर भी कोर्ट ने लंबे समय तक बिना मुकदमा पूरा हुए जेल में रखने को लेकर संवैधानिक चिंता को माना और खालिद और इमाम को सुरक्षित गवाहों की गवाही दर्ज होने के बाद या एक साल बाद फिर से जमानत मांगने की अनुमति दी.
खालिद के लिए बुधवार का आदेश दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज किए जाने का तीसरा मौका है. इससे पहले अक्टूबर 2022 और सितंबर 2025 में भी ऐसी ही याचिकाएं खारिज की गई थीं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आदेशों को बरकरार रखा था. इमाम की जमानत याचिका अब दूसरी बार हाई कोर्ट ने खारिज की है.
UAPA का बड़ा सवाल
यह मामला UAPA के तहत लंबे समय तक जेल में रखे जाने को लेकर चल रही बड़ी बहस के बीच आया है. हाल में अदालतों ने कई मामलों में जमानत दी है, जहां मुकदमे के कई सालों तक पूरा होने की संभावना नहीं थी. अदालतों ने संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए जल्दी सुनवाई के अधिकार को ध्यान में रखा है. अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से जुड़ा है.
मिसाल के तौर पर, दिल्ली हाई कोर्ट ने कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज और पत्रकार इरफान मेहराज को चार साल से ज्यादा समय तक हिरासत में रहने के बाद जमानत दी. दूसरी अदालतों ने भी UAPA के तहत जमानत याचिकाओं पर फैसला करते समय मुकदमों की रफ्तार को ध्यान में रखा है.
इस बहस के केंद्र में धारा 43D(5) है. इसमें जमानत के लिए कड़ी शर्त रखी गई है, जब अदालत को यह मानने के उचित आधार मिलते हैं कि आरोपी के खिलाफ लगाया गया आरोप पहली नजर में सही है. सुप्रीम कोर्ट के 2021 के केए नजीब फैसले और उसके बाद के फैसलों में भी यह बताया गया है कि कानून में जमानत पर लगाई गई पाबंदी को संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए अधिकार के साथ कैसे संतुलित किया जाना चाहिए.
आदित्य इदरा TPSJ के पूर्व छात्र हैं और अभी दिप्रिंट के साथ इंटर्नशिप कर रहे हैं.
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