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Wednesday, 30 September, 2026
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NCERT की 9वीं की किताब में NEP 2020 की तारीफ, ‘राम राज्य’ को सुशासन का मॉडल बताया

किताब में कहा गया है कि गांधी ने ‘राम राज्य’ को शासन के आदर्श मॉडल के रूप में देखा था. यह ‘ईमानदारी, पारदर्शिता, करुणा, कल्याण और शासन व सार्वजनिक नीति में लोगों को केंद्र में रखने’ पर आधारित था.

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नई दिल्ली: नई NCERT 9वीं क्लास की सामाजिक विज्ञान की किताब में नरेंद्र मोदी सरकार की प्रमुख नीतियों, जिनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और खेलो भारत नीति 2025 शामिल हैं, को “सुशासन” के उदाहरण बताया गया है. किताब में कहा गया है कि ये नीतियां “सलाह-मशवरे, विशेषज्ञों की राय और जनता की भागीदारी” के जरिए बनाई गईं.

किताब—‘Understanding Society: India and Beyond, Part 2’—मंगलवार को बिक्री के लिए आई. इसमें ‘Governance and Public Policy’ नाम का एक चैप्टर है. इसमें संस्कृत की कहावत “Prajasukhe sukham rajnah, prajanam cha hite hitam” का ज़िक्र किया गया है, जिसका मतलब है, “जनता की खुशी में शासक की खुशी है और जनता के हित में शासक का हित है.”

चैप्टर में भारत में शासन व्यवस्था के विकास के बारे में भी बताया गया है. इसमें औपनिवेशिक संस्थाओं से लेकर ‘राम राज्य’ के प्राचीन आदर्श तक का जिक्र है. इसे “सुशासन और अच्छे सामूहिक जीवन के सबसे अच्छे उदाहरणों में से एक” बताया गया है.

चैप्टर में यह भी कहा गया है कि शासन सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है. प्रभावी शासन और जनता के कल्याण को सुनिश्चित करने में नागरिकों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और निजी क्षेत्र की भी भूमिका है.

NEP 2020: सलाह-मशवरे का ‘बेहतरीन उदाहरण’

किताब में NEP 2020 को “सलाह-मशवरे, विशेषज्ञों की राय और जनता की भागीदारी के जरिए सार्वजनिक नीति कैसे बनाई जाती है, इसका बेहतरीन उदाहरण” बताया गया है.

इसमें बताया गया है कि इसकी प्रक्रिया 2015 में शुरू हुई, जब केंद्र ने नई शिक्षा नीति पर काम शुरू किया. इसके बाद 2017 में वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई.

किताब में कहा गया है कि समिति में शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, सामाजिक विज्ञान और लोक प्रशासन के विशेषज्ञ शामिल थे. वहीं, नीति के मसौदे को नागरिकों और इससे जुड़े पक्षों की राय के लिए रखा गया था.

किताब के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6,600 ब्लॉक, 6,000 शहरी स्थानीय निकायों और 676 जिलों से सलाह ली गई. इस दौरान करीब दो लाख सुझाव मिले.

किताब में कहा गया है, “अंतिम नीति तैयार करने से पहले नागरिकों और संस्थानों की कई सिफारिशों को इसमें शामिल किया गया.”

हालांकि, NEP 2020 को कई राज्यों के विरोध का सामना करना पड़ा है. इन राज्यों ने इसे एकतरफा नीति बताया है. इसके लागू होने को लेकर केंद्र और तमिलनाडु, केरल जैसे राज्यों के बीच विवाद रहा है. पहले तृणमूल कांग्रेस की सरकार वाले पश्चिम बंगाल में भी इसे लेकर केंद्र और राज्य के बीच मतभेद रहा है.

खेलो इंडिया नीति 2025 के मामले में किताब का ध्यान नीति बनाने से हटकर इसे लागू करने पर है. किताब में कहा गया है कि इसकी सफलता “राज्यों, जिलों, स्थानीय निकायों, स्कूलों, कोच, परिवारों और खिलाड़ियों” के बीच तालमेल पर निर्भर करती है.

इसमें “Policy coordination: Key to good governance” नाम वाले एक हिस्से में इस नीति का ज़िक्र किया गया है.

किताब में नीति के हवाले से कहा गया है, “ब्लॉक स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक खेल संस्कृति और इसके पूरे सिस्टम को मजबूत करना खेलो भारत नीति 2025 का एक प्रमुख फोकस है.”

किताब में एक और प्रमुख योजना, “प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना” का भी जिक्र किया गया है. इसमें छात्रों से इस योजना के फायदों के बारे में जानने के लिए कहा गया है.

औपनिवेशिक संस्थाओं से ‘राम राज्य’ तक

किताब में कहा गया है कि महात्मा गांधी ने “राम राज्य” को शासन के आदर्श मॉडल के रूप में देखा था. यह “ईमानदारी, पारदर्शिता, करुणा, कल्याण और शासन तथा सार्वजनिक नीति में लोगों को केंद्र में रखने” पर आधारित था.

किताब में कहा गया है कि गांधी का यह विचार दूर के अतीत से लेकर आज तक “भारतीयों की सामूहिक सोच” को दिखाता है. इसमें रामायण और 16वीं सदी की रामचरितमानस में बताए गए राम राज्य को “सुशासन और अच्छे सामूहिक जीवन के सबसे अच्छे उदाहरणों में से एक” बताया गया है.

किताब में आगे कहा गया है कि वैदिक काल से लेकर रामायण और महाभारत तक, भारतीय परंपराओं में शासन को सिर्फ सत्ता चलाने के साधन के बजाय “पवित्र जिम्मेदारी” माना गया.

इसमें इसे राजधर्म की अवधारणा के जरिए समझाया गया है. राजधर्म को एक आदर्श राजा का सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य बताया गया है. इसका मतलब है धर्म या सही कर्तव्य का पालन करते हुए लोगों की रक्षा करना और समाज के कल्याण को बढ़ावा देना.

अध्याय में भारत की शासन संस्थाओं के विकास के बारे में बताया गया है. इसमें औपनिवेशिक विरासत से लेकर औपनिवेशिक दौर से पहले की परंपराओं और संविधान के मूल्यों तक का जिक्र है. किताब में कहा गया है कि आधुनिक भारतीय संस्थाएं शासन के पुराने विचारों से लगातार प्रेरणा लेती रही हैं.

किताब में कहा गया है कि औपनिवेशिक शक्तियों ने उन समाजों पर अपनी शासन व्यवस्था थोप दी, जहां पहले “स्थानीय और स्वाभाविक व्यवस्थाएं” थीं. वहीं, आजादी के बाद भी कई औपनिवेशिक संस्थाएं जारी रहीं.

किताब के अनुसार, भारत ने अपने औपनिवेशिक दौर से पहले की संस्थाओं और परंपराओं की जानकारी को ग्रंथों और प्रथाओं के जरिए बनाए रखा. वहीं, 1947 के बाद संविधान “भारत के अपने मूल्यों और आदर्शों” के अनुसार बनाया गया.

अध्याय में मुंडक उपनिषद से लिए गए ‘सत्यमेव जयते’ का जिक्र राष्ट्रीय आदर्श वाक्य के रूप में किया गया है. इसे ब्रिटिश दौर के “Heaven’s Light, Our Guide” की जगह अपनाया गया. इसमें यह भी बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट का आदर्श वाक्य, “Yato Dharmastato Jayah” यानी “जहां धर्म है, वहां जीत है”, महाभारत से लिया गया है.

किताब में सेंगोल का भी जिक्र किया गया है. इसे “शासन और सुशासन का सांस्कृतिक प्रतीक” बताया गया है. इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में नए संसद भवन में इसे स्थापित किया था.

किताब में इस परंपरा को चोल राजवंश से जोड़ा गया है और कहा गया है कि आजादी के समय जवाहरलाल नेहरू को तमिलनाडु के शैव मठों के संतों ने सेंगोल दिया था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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