जबलपुर, चार अगस्त (भाषा) मध्यप्रदेश में करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने सोमवार को उच्च न्यायालय को शैक्षणिक कैलेंडर सौंपते हुए बताया कि सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराए जाएंगे।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की पीठ ने उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पेश की गई जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि छात्रसंघ चुनाव के नाम पर विद्यार्थियों से शुल्क तो लिया जा रहा है, लेकिन चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं।
छात्र नेता अदनान अंसारी की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि राज्य के सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में वर्ष 2017 से छात्रसंघों के गठन की प्रक्रिया ठप है, जिससे विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ा है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार लिंगदोह समिति की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर रही है।
उच्च न्यायालय ने इस वर्ष जनवरी में सुनवाई के दौरान वर्ष 2026-27 के छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए शैक्षणिक कैलेंडर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। पिछले महीने राज्य सरकार ने योजना पेश करने के लिए और समय मांगा था, जिसे उसने सोमवार को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 का शैक्षणिक कैलेंडर पेश करते हुए सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराने के प्रावधान की जानकारी दी।
याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि छात्रसंघ चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकारी विश्वविद्यालय राज्य सरकार से आवश्यक पुलिस और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी करें।
पीठ ने महाविद्यालयों के प्राचार्यों और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर पुलिस और प्रशासनिक सहायता प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, ताकि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
भाषा सं दिमो शोभना सुरभि
सुरभि
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.