नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) भारत के लोकतंत्र के बारे में लंदन में दिए गए बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों द्वारा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से माफी की मांग और कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों की अडाणी समूह से जुड़े मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने पर जोर देने से संसद के दोनों सदनों में गतिरोध जारी रहा और सोमवार को लगातार छठे दिन कोई कामकाज नहीं हो सका।
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र को लेकर अपनी टिप्पणी के लिए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यदि माफी मांग लेते हैं, तो संसद में गतिरोध खत्म हो सकता है।
वहीं, कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार संसद में कामकाज नहीं होने देना चाहती है और अडाणी मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
बजट सत्र के दूसरे चरण के प्रारंभ से ही ब्रिटेन में भारतीय लोकतंत्र के बारे में हाल ही में दिए गए राहुल गांधी के एक बयान को लेकर सत्तारूढ भाजपा द्वारा कांग्रेस पर निशाना साधा जा रहा है और कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष से माफी की मांग की जा रही है। वहीं, कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल अडाणी समूह से जुड़े मामले की जांच के लिए जेपीसी के गठन की मांग कर रहे हैं। इन विषयों पर हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही पिछले सप्ताह बाधित हुई थी।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उन्हें ब्रिटेन में दिए उनके एक बयान को लेकर सदन में अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।
ब्रिटेन से लौटने के बाद राहुल गांधी ने पिछले सप्ताह बिरला से मुलाकात भी की थी।
सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी भारतीय लोकतंत्र के संदर्भ में दिए अपने उस बयान को लेकर सदन में अपना पक्ष रखना चाहते हैं, जिसको लेकर भारतीय जनता पार्टी उनसे लगातार माफी की मांग कर रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘‘हमने कल (मंगलवार) के लिए समय मांगा है, अगर उन्हें (राहुल गांधी) अनुमति मिलती है, तब वे अपनी बात रखेंगे।’’
दूसरी ओर, यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता एवं केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने भारत में मौजूदा स्थिति पर गांधी के दावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया और उनसे यह स्पष्ट करने का आग्रह किया कि क्या वह ‘‘किसी एजेंडे के तहत ऐसा कर रहे हैं’’।
ज्ञात हो कि हाल ही में लंदन में एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि भारतीय लोकतंत्र के ढांचे पर ‘‘बर्बर हमला’’ हो रहा है। उन्होंने अफसोस जताया कि अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया के लोकतांत्रिक हिस्से इस पर ध्यान देने में नाकाम रहे हैं।
पुरी ने कहा, ‘‘अगर कोई व्यक्ति देश के बाहर जाता है, तो उसे बोलने की आजादी है। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी की भावना भी आती है।’’
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे पुराना लोकतंत्र है और इसमें कोई संदेह नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन गांधी का ब्रिटेन जाना और यह कहना कि भारतीय लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे पर हमले हो रहे हैं… कोई भी यह कहता है कि भारतीय लोकतंत्र खतरे में है, तो उसे गंभीर आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है।’’
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री ने मांग की कि कांग्रेस नेता को इस मुद्दे को खत्म करने के लिए अपनी टिप्पणी के लिए स्पष्ट रूप से माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘आगे बढ़ने के लिए मुझे लगता है कि इसे बंद करने की जरूरत है और यह तभी बंद होगा, जब वह माफी मांगेंगे। और, उन्हें स्पष्ट रूप से माफी मांगनी चाहिए।’’
यह पूछे जाने पर कि संसद में गतिरोध कैसे खत्म होगा, पुरी ने कहा, ‘‘यह फैसला तो उन्हें (गांधी को) करना है। उन्हें स्पष्ट रूप से माफी मांगनी चाहिए और कहना चाहिए कि उन्होंने गलती की और इसलिए वह माफी मांगते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी समझ है कि इससे संसद के कामकाज का मार्ग प्रशस्त होगा।’’
वहीं, कांग्रेस, द्रमुक, राजद, माकपा, भाकपा, राकांपा, जद(यू), आप, शिवसेना सहित कई दलों ने सोमवार की सुबह राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में बैठक की और जेपीसी की मांग पर उनकी रणनीति को लेकर समन्वय बनाया।
संसद के दोनों सदनों की बैठक अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित होने के बाद विपक्षी नेताओं ने संसद में गतिरोध के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने दावा किया कि सत्तापक्ष की तरफ से जो ‘ड्रामा’ किया जा रहा है, वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इशारे के बिना नहीं हो सकता।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘लाखों करोड़ रुपये के घोटाले के बावजूद हमारी जेपीसी की मांग स्वीकार नहीं कर रहे हैं। जेपीसी की जांच हुई, तो भाजपा बेनकाब हो जाएगी। इसीलिए, भाजपा जेपीसी के गठन की मांग नहीं मान रही है।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसी प्रयास के तहत राहुल गांधी के आवास पर गैरकानूनी ढंग से पुलिस को भेजा गया और कई विपक्षी नेताओं को एजेंसियों के जरिये आंतकित किया जा रहा है।’’
वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘ आज दोपहर 2 बजे के आसपास जब विपक्षी सदस्य अपनी सीट पर बैठे भी नहीं थे, तब से ही भाजपा सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और राज्यसभा को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। साफ है कि मोदी सरकार संसद नहीं चलने देना चाहती है।’’
इससे पहले, उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि मोदी सरकार अड़ियल रवैया अपनाते हुए विपक्ष को पीएम से जुड़े अडाणी महाघोटाले के लिए उपयुक्त जेपीसी की मांग रखने की इज़ाजत नहीं दे रही है।
जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष ललन सिंह ने सोमवार को संसद में गतिरोध के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जिम्मेदार ठहराया और जोर देकर कहा कि सत्तारूढ़ दल देशभक्ति और देशद्रोह की परिभाषा तय नहीं कर सकता है।
शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि पहली बार सत्तारूढ़ पार्टी संसद में बाधा उत्पन्न कर रही है, जबकि विपक्ष अडाणी मामले पर जेपीसी का गठन और चर्चा चाहता है।
समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने कहा कि अगर जेपीसी की जांच होती है, तब वास्तविक दोषी सामने आयेंगे और भाजपा का पर्दाफाश हो जायेगा।
इससे पहले, लोकसभा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से कहा कि वे उनके कक्ष में आए, चर्चा करें और रास्ता निकालें।
भाषा दीपक
दीपक दिलीप
दिलीप
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