तस्वीर: आनंद दत्ता
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पलामू : झारखंड के पलामू में एक पंचायत ने एक लड़की पर बदचलन होने का आरोप लगाया. लड़की के पिता से कहा बेटी को संभालो, वह दूसरे जाति के लड़के प्रेम करती है और संभालने से पहले 41 हजार रुपए जुर्माना भरो. पिता ने अक्षमता जाहिर की जिसके बाद कहा गया कि 21 हजार दो. नहीं दे सका जिसके बाद 11 हजार की मांग की गई.

तत्काल किसी से कर्ज लेकर पिता ने सात हजार रुपए दिए और पंचायत खत्म हुई. परेशान बाप वहां से उठकर सीधा पास के जंगल में गया और पेड़ से लटक कर आत्महत्या कर ली. रांची से 207 किलोमीटर दूर उलडंडा पंचायत के मुसुरमू गांव में बीते 18 अगस्त को कुलदीप प्रजापति (41) ने सामाजिक दवाब में खुद को खत्म कर लिया. अब घर में पत्नी तेतरी देवी (38) के अलावा तीन बेटियां और दो बेटे हैं.

गांव के 200 से अधिक लोग भोज खाएंगे जिसमें 30 हजार से अधिक खर्च आएगा

रामगढ़ थाना के प्रभारी घुमा किस्कू के मुताबिक मामले में सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और चार फरार हैं. खबर लिखे जाने तक उनकी तलाश में छापेमारी चल रही है. तेतरी देवी एक बार फिर कर्ज लेने की जुगत में लग गई हैं, क्योंकि रिवाज के मुताबिक उन्हें इसी समाज के लोगों को पति के मरने की वजह से दो दिन तक खाना खिलाना है. गांव के 200 से अधिक लोग भोज खाएंगे जिसमें 30 हजार से अधिक खर्च आएगा.

मृतक का घर तस्वीर: आनंद दत्ता

तेतरी कहती है, ‘भोज नहीं खिलाएंगे तो समाज में रहेंगे कैसे? कोई मेरे घर में पानी पीने आएगा क्या? मुझे आगे भी जीवन जीना है. तीन बेटियों की शादी करनी है. बच्चे पालने हैं.’ गांव में 60 घर हैं. इसमें सबसे अधिक अहिर (यादव), सोनार और मात्र छह घर प्रजापति के हैं. घटना के बारे में उन्होंने बताया कि ‘उस दिन सुबह समाज (कुम्हार जाति) के लोग आए और उनके पति को लेकर गए. कहा पंचायत लगी है, चलो. बड़ी बेटी जिसपर आरोप लगाया गया, वह भी जाने की जिद करने लगी, लेकिन उसे मना कर दिया.’

पंचायत में मौजूद कुलदीप के भतीजे संजय प्रजापति ने बताया कि गांव के 10 लोग थे बाकि इसी जाति के दूसरे गांव से लोगों को बुलाया गया था. पहले तो सबने बहुत बेज्जति की और फिर मारपीट करने लगे. आरोप लगाया गया कि लड़की अहिर जाति के लड़के से प्रेम करती है. इससे उनका समाज बदनाम हो रहा है. गांव के ही स्कूल में सुबह 9 बजे लगी पंचायत शाम चार बजे खत्म हुई. इसके बाद उसके चाचा वहां से उठकर चले गए.

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दो दिन बाद यानी 20 अगस्त तक वह घर नहीं आए. उसी दिन शाम को किसी ने कहा कि उनकी लाश जंगल में पेड़ पर लटकी है. तेतरी देवी कहती हैं, ‘मैं भागे-भागे ढोगी महुआ जंगल गई. मेरा मरद तो इस दुनिया से चला गया था. तब तक पुलिस को ख़बर गई और वह आकर लाश पोस्टमार्टम के लिए ले गई. अगले दिन दाह-संस्कार कराया गया.’

गांव के देवनारायण यादव ने बताया कि, ‘हमलोग भी पंचायत में मौजूद थे. लेकिन किसी को बोलने की ईजाजत नहीं थी. जिस वक्त मृतक के घर रिपोर्ट के सिलसिले में पहुंचा, महज कुछ मिनट बाद ही अहिर जाति के कई लोग वहां पहुंच चुके थे.’ देवनारायण का कहना था, ‘प्रजापतियों ने अगर हमारे समाज के लड़के पर आरोप लगाया तो उसका नाम बताना चाहिए था. लेकिन पंचायत में नाम तक नहीं बताया गया कि किस लड़के से प्रेम करती है.’

सबसे छोटे बेटे कुंडल (7) को पास में बिठाए तेतरी देवी ने कहा कि उनको तो खपरैल या मिट्टी का कोई सामान बनाना नहीं आता है, खेती भी करनी नहीं आती और समझ नहीं आ रहा ये पांच बच्चे अब कैसे पालेंगी. बातचीत के दौरान उनका दूसरा बेटा संतोष (5) और बेटी शिवपुजनी (14), शिलू (12) पहुंचे. ये सभी बकरी चराने गए थे.

तेतरी को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर नहीं मिला है

परिवार के घर में बचे हुए खपरैल
तस्वीर: आनंद दत्ता

तेतरी को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर नहीं मिला है. उज्जवला योजना के तहत बीते साल नवंबर में गैस तो मिला, लेकिन दोबारा वह आज तक उसमें गैस नहीं भरवा सकीं. पति बटाईदारी के एक एकड़ खेत में खेती करते थे. यह जमीन गांव के यादवों की ही थी. परिवार की तैयारी इस बात की थी कि इस बार धान हुआ तो गैस भरवा लेंगे.

मिट्टी के चूल्हे के पास कुछ पके हुए खपरैल रखे हुए थे जिसे दिखाते हुए उन्होंने कहा, ‘अब कौन बनाएगा ये सब.’ परिवार के पास दो बैल के अलावा एक गाय और दो बकरी हैं. इस बीच बड़ी बेटी, जिसपर गांववालों ने बदचलन होने का आरोप लगाया था, वह भी कहीं से आई. आंगन में भीड़ देख वह चुपचाप घर में घुस गई.

झारखंड सरकार ने कुम्हारों की स्थिति सुधारने के लिए माटी कला बोर्ड की स्थापना की है. अविनाश देव जो इसी इलाके के हैं और बोर्ड के सदस्य भी हैं वो कहते हैं, ‘गांव में प्रजापति समाज के लोगों ने बताया कि कुलदीप की बेटी बदचलन है. ऐसे में उनके गांव में दूसरी लड़कियों के साथ कौन शादी करेगी.’ उन्होंने यह भी कहा कि यह बेहद निंदनीय घटना है. फिलहाल 10 हजार रुपए की सहायता राशि दी गई है. आगे मृतक के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का इंतजाम भी किया जाएगा.

रामगढ़ थाना के प्रभारी घुमा किस्कू ने कुछ अलग ही बात बताई. उन्होंने कहा कि, ‘प्रेम प्रसंग वाली कोई बात ही नहीं थी. अगर ऐसा होता तो उनका एसपीओ (गुप्तचर) उसी गांव का है, वह तो बताता. फिलहाल जांच होने दीजिए, फिर पूरी स्थिति स्पष्ट होगी.’

दर्ज एफआईआर के मुताबिक जितेंद्र प्रजापति, उदय प्रजापति, रामोतार प्रजापति, बिनोद प्रजापति, रामचंद्र प्रजापति, विनोद प्रजापति और जुनू प्रजापति के खिलाफ आईपीसी की धारा 306/34 (आत्महत्या के लिए उकसाना, हल्की चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

गांव से निकलते वक्त विमला कुमारी ने आवाज दिया कि उसे भी कुछ कहना है. उसके पिता जितेंद्र प्रजापति भी उस बैठक में और फैसला सुनाने वालों में शामिल थे. फिलहाल वह गिरफ्तारी की डर से भागे हुए हैं.

उसने कहा कि गांव के कैलाश यादव के बेटे उपेंद्र यादव के साथ उसका संबंध है. उसके बाप ने अपनी बेटी की वजह से फांसी लगाई है, पंचायत की वजह से नहीं. वहीं गीता देवी ने विमला की बात से सहमति जताते हुए कहा कि उसके पति जितेंद्र प्रजापति भी फिलहाल फरार हैं.

बीते 13 तारीख़ को झारखंड के सिमडेगा ज़िले में दो लड़कियों ने आत्महत्या कर ली. इनमें से एक ओडिशा की रहनेवाली थी और दोनों ही हॉकी खिलाड़ी थीं. लोगों को कानूनी सहायता देनेवाली संस्था आली की निदेशक रेशमा कुमारी ने बताया कि मामला समलैंगिकता से जुड़ा हुआ था. फिलहाल जांच चल रही है.

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