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Friday, 23 October, 2026
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‘वंदे मातरम्’ संबंधी जनहित स्थानांतरित करने के अनुरोध पर सुनवाई करेगा न्यायालय

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नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय 27 अक्टूबर को उस याचिका पर सुनवाई कर सकता है, जिसमें ‘वंदे मातरम्’ गीत को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने की मांग वाली जनहित याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय से उसके पास स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है।

उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेगी।

अधिवक्ता अश्वनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में अनुरोध किया गया है कि जनहित याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरित किया जाए, क्योंकि इसी तरह की एक रिट याचिका पहले से ही शीर्ष अदालत में लंबित है।

याचिका में कहा गया है, ‘‘‘वंदे मातरम्’ हमारे इतिहास, संप्रभुता, एकता और गौरव का प्रतीक है। यदि कोई नागरिक किसी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कृत्य के माध्यम से इसका अनादर करता है, तो यह न केवल असामाजिक गतिविधि होगी, बल्कि एक संप्रभु राष्ट्र के नागरिक के रूप में हमारे सभी अधिकारों और हमारे अस्तित्व के लिए भी विनाशकारी साबित होगी।’’

याचिका में कहा गया है, ‘‘इसलिए प्रत्येक नागरिक को न केवल ऐसी गतिविधियों से दूर रहना चाहिए, बल्कि ‘वंदे मातरम्’ का अनादर करने की कोशिश करने वाले किसी भी उपद्रवी को रोकने के लिए भी हरसंभव प्रयास करना चाहिए। हमें अपने राष्ट्र, संविधान, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज पर गर्व होना चाहिए तथा अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रीय हित को रखना चाहिए तभी हम अपनी कठिन संघर्ष से हासिल की गई स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा कर सकेंगे। वंदे मातरम् को बढ़ावा देने और उसका प्रचार-प्रसार करने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाना कार्यपालिका का कर्तव्य है।’’

जनहित याचिका में अनुरोध किया गया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान हो और उसे राष्ट्रगान के समान दर्जा दिया जाए।

याचिकाकर्ता ने केंद्र और दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया है कि प्रत्येक कार्यदिवस पर सभी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ गाए और बजाए जाएं। याचिकाकर्ता का कहना है कि गीत के सम्मान के लिए दिशानिर्देशों या नियमों के अभाव में ‘वंदे मातरम्’ को ‘‘असभ्य तरीके से’’ गाया जा रहा है और फिल्मों तथा पार्टियों में उसका दुरुपयोग किया जा रहा है।

याचिका में कहा गया है कि ‘वंदे मातरम्’ का नाटकीय मंचन नहीं होना चाहिए और इसे किसी भी विविध मनोरंजन कार्यक्रम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि जब भी इसे गाया या बजाया जाए तो वहां मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के लिए इसके प्रति उचित सम्मान और आदर प्रदर्शित करना अनिवार्य हो।

भाषा गोला वैभव

वैभव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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