नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) लगातार बढ़ती ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण पृथ्वी के वायुमंडल की उन परतों में हवा के कम स्थिर होने और वातावरण के अधिक अशांत होने की आशंका है, जहां विमान आमतौर पर उड़ान भरते हैं। ब्रिटेन स्थित रीडिंग विश्वविद्यालय के हालिया अध्ययन में यह बात कही गई है।
अध्ययन में पाया गया कि वायुमंडल की इन परतों में हवाई यात्रा में व्यवधान 1979 में 17.7 घंटों से 55 फीसदी बढ़कर 2020 में 27.4 घंटे हो गया।
शोधकर्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण उपजी परिस्थितियों के चलते हवाई जहाजों में अधिक मजबूत पवन-विक्षेपण उत्पन्न होता है, जो कि उच्च ऊंचाई पर ग्रह के चारों ओर बहने वाली तीव्र गति वाली वायु धाराएं हैं।
अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल ऑफ द एटमॉस्फियरिक साइंसेज’ में प्रकाशित किए गए हैं।
अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 2015-2100 के दौरान वायु-विक्षेपण में 16-27 फीसदी की वृद्धि हो सकती है और वायुमंडल 10-20 प्रतिशत कम स्थिर हो सकता है। इसमें कहा गया है कि उत्तरी और दक्षिणी, दोनों गोलार्ध पर इसका असर पड़ने की आशंका है।
भाषा पारुल मनीषा
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