नयी दिल्ली, दो नवंबर (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सिफारिश की है कि यूजीसी और सीबीएसई को ऐसी निगरानी व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जिससे विश्वविद्यालयों और स्कूलों द्वारा दिव्यांग छात्रों के लिए रैंप, व्हीलचेयर और सुलभ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित हो सके।
दो अलग-अलग आदेश में, सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने शैक्षणिक संस्थानों में दिव्यांग छात्रों से जुड़े प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उपाय सुझाने के वास्ते सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 की धारा 25(5) का इस्तेमाल किया।
ये सिफारिशें एक आवेदक द्वारा दायर की गई अपील के बाद आई हैं, जिसने बिहार के शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी सुगम्यता ढांचे की कमी के बारे में शिकायत की थी।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से जुड़ी अपील में, आवेदक ने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में दिव्यांग जनों के लिए सुविधाओं के अभाव के संबंध में की गई शिकायत पर जांच रिपोर्ट, और की गई कार्रवाई का विवरण मांगा था।
विश्वविद्यालय ने सीआईसी को सूचित किया कि प्रशासनिक भवन और महत्वपूर्ण विभागों तक पहुंचने के लिए रैंप बनाए गए हैं, जबकि दिव्यांग पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग सुलभ शौचालयों का निर्माण कार्य जारी है।
सभी संबद्ध कॉलेजों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि वे रैंप (हैंडरेल के साथ), सुलभ शौचालय, जरूरत के अनुसार लिफ्ट, निर्धारित पार्किंग, उपयुक्त लाइब्रेरी सुविधाएं और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराएं। इसके बाद, कॉलेजों से इन सुविधाओं की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी देने को कहा गया।
सीआईसी ने सिफारिश की कि यूजीसी, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप निर्बाध पहुंच के लिए उचित दिशानिर्देश जारी करे और यह सुनिश्चित करे कि मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय इनका सख्ती से पालन करे।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़ी एक अलग अपील में, आवेदक ने बिहार और दिल्ली-एनसीआर के निजी और सरकारी स्कूलों में दिव्यांग जनों की सुविधाओं से संबंधित शिकायतों पर की गई कार्रवाई का विवरण मांगा था।
सीबीएसई ने सीआईसी को बताया कि उसने विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए सुविधाओं के संबंध में अपने सभी संबद्ध स्कूलों को अनिवार्य दिशानिर्देश जारी किए हैं।
भाषा सुभाष माधव
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