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Sunday, 19 April, 2026
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उत्तराखंड में चारधाम यात्रा रविवार से, अक्षय तृतीया पर खुलेंगे गंगोत्री व यमुनोत्री के कपाट

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देहरादून, 18 अप्रैल (भाषा) अक्षय तृतीया के अवसर पर रविवार को गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने के साथ ही उत्तराखंड में इस वर्ष की चारधाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी।

हालांकि, इस वर्ष मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं।

यात्रा से एक दिन पहले शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश से चारधाम जाने वाली बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और देशभर से आए श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

चारधाम में शामिल अन्य दो धाम रुद्रप्रयाग जिले स्थित केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को, जबकि चमोली जिले स्थित बदरीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे।

इस वर्ष चारधामों में से तीन धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है और मंदिरों में प्रवेश के लिए निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।

इस वर्ष 10 मार्च को हुई बैठक में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर परिसरों में गैर- सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी।

हालांकि, बाद में समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई गैर-हिंदू सनातन धर्म के प्रति आस्था का हलफनामा देता है, तो उसे दर्शन की अनुमति दी जा सकती है।

इसी तरह, गंगोत्री मंदिर समिति ने भी घोषणा की है कि गैर- सनातनियों को पंचगव्य (गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी) ग्रहण करने के बाद ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति होगी।

वहीं, यमुनोत्री मंदिर समिति ने अलग रुख अपनाते हुए ‘‘अतिथि देवो भव:’’ की परंपरा के तहत श्रद्धा भाव से आने वाले सभी श्रद्धालुओं का बिना जाति-धर्म पूछे स्वागत करने का निर्णय लिया है।

इसके अलावा, इस बार चारों धाम के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों के उपयोग पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया गया है जिसके तहत बदरीनाथ और केदारनाथ में श्रद्धालुओं को परिसर के बाहर ही अपने मोबाइल व कैमरे जमा करने होंगे, जबकि गंगोत्री व यमुनोत्री में मंदिर परिसर से 100 मीटर के दायरे में इनके उपयोग पर रोक रहेगी।

अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्षों में दर्शन व्यवस्था में आई बाधाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

देवी गंगा को समर्पित गंगोत्री धाम के कपाट दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर खोले जाएंगे जिसके लिए उनकी डोली शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा से शनिवार को गंगोत्री के लिए रवाना हो चुकी है।

वहीं, देवी यमुना की डोली खरसाली गांव से रविवार सुबह रवाना होगी और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद 12 बजकर 35 मिनट पर यमुनोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल ने बताया कि मंदिर खुलने के आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा को आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने वाला बताते हुए कहा कि राज्य सरकार का संकल्प यात्रा को सुगम, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और दिव्य बनाना है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि देवभूमि की पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इस वर्ष ‘प्लास्टिक मुक्त’ और ‘हरित’ चारधाम यात्रा का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत सभी वाहनों में कूड़ादान रखना अनिवार्य किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘जैसे हम अपने घर के मंदिर को साफ और पवित्र रखते हैं, वैसे ही देवभूमि को भी स्वच्छ और पवित्र बनाए रखना है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा को और सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिनमें हाल में करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लगात से तैयार दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, बारहमासी सड़क परियोजना तथा गौरीकुंड-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाएं शामिल हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष की चारधाम यात्रा अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ेगी ।

प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद पिछले वर्ष चारधाम यात्रा में 51 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। इस बार भी श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है और अब तक करीब 19 लाख लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण करा चुके हैं।

भाषा दीप्ति खारी

खारी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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