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Friday, 5 June, 2026
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दिप्रिंट की रिपोर्ट के महीने बाद ASI के ‘घोस्ट कैंपस’ के लिए पहली बार प्रशासक नियुक्त

राष्ट्रीय अभिलेखागार के पूर्व महानिदेशक अरुण सिंघल दो साल तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी का संचालन करेंगे, उन्हें पूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दिए गए हैं.

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नई दिल्ली: ग्रेटर नोएडा स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी (पुरातत्व संस्थान) की स्थिति पर दिप्रिंट की विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित होने के एक महीने बाद संस्कृति मंत्रालय ने संस्थान के कामकाज की निगरानी के लिए एक प्रशासक नियुक्त किया है.

इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी के सात दशक लंबे इतिहास में यह पहली बार है जब किसी प्रशासक की नियुक्ति की गई है. अब तक संस्थान का संचालन एक निदेशक करता था, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक को रिपोर्ट करता था.

29 मई के एक आदेश में, जिसकी प्रति दिप्रिंट के पास है, राष्ट्रीय अभिलेखागार (नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया) के पूर्व महानिदेशक अरुण सिंघल को दो साल के लिए अनुबंध के आधार पर प्रशासक नियुक्त किया गया है.

संस्कृति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है, “नियुक्त अधिकारी को इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी के दैनिक कामकाज के संबंध में विभागाध्यक्ष/कार्यालय प्रमुख के बराबर पूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार प्राप्त होंगे.” दिप्रिंट के पास इस आदेश की प्रति है.

पिछले साल अरुण सिंघल राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए थे. वहां उन्होंने 30 करोड़ अभिलेखीय पन्नों (आर्काइव पेज) के डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाया था.

प्रशासक की नियुक्ति इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा और अभूतपूर्व बदलाव है. यह संकेत देता है कि केंद्र सरकार इस प्रमुख संस्थान को फिर से सक्रिय करने और उसका पुनर्गठन करने की कोशिश कर रही है. यह संस्थान 289 करोड़ रुपये के निवेश के बावजूद लंबे समय से खाली पदों और इसके उपयोग को लेकर उठते सवालों से जूझ रहा है.

संस्थान को सीधे एक ऐसे प्रशासक के अधीन रखने का फैसला, जो संस्कृति सचिव को रिपोर्ट करेगा, यह दिखाता है कि मंत्रालय इसके शैक्षणिक, वित्तीय और संस्थागत कामकाज पर अधिक कड़ी निगरानी रखना चाहता है.

अप्रैल में दिप्रिंट ने सबसे पहले रिपोर्ट की थी कि 289 करोड़ रुपये की लागत से बने इस भव्य परिसर में केवल 15 छात्र हैं और एक भी शिक्षक नहीं है.

रिपोर्ट प्रकाशित होने के दो सप्ताह बाद संस्कृति मंत्रालय ने 25 एकड़ में फैले इस परिसर की भूमिका और कामकाज को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया था.

अब मंत्रालय ने इस संस्थान के कामकाज में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. इस संस्थान का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में किया था.

हालिया, आदेश में मंत्रालय ने प्रशासक की शक्तियों को भी स्पष्ट किया है.

आदेश में कहा गया है, “नियुक्त अधिकारी इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी के प्रशासक के रूप में कार्य करेगा.” साथ ही यह भी कहा गया है कि वह संस्कृति मंत्रालय के सचिव को रिपोर्ट करेगा.

आदेश के अनुसार, 1987 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अरुण सिंघल को दो साल के लिए अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया है. हालांकि आवश्यकता पड़ने पर उनका कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है.

आदेश में कहा गया है, “नियुक्त अधिकारी इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी की शैक्षणिक, प्रशासनिक, वित्तीय, शोध, प्रशिक्षण और संस्थागत विकास से जुड़ी गतिविधियों का मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण करेगा.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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