नई दिल्ली: गृह मंत्रालय (MHA) ने शुक्रवार को जमीन पर काम कर रहे जनगणना अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जनगणना के दूसरे चरण के दौरान लोगों से उनकी जाति के बारे में पूछें. एक गजट नोटिफिकेशन में यह जानकारी दी गई है. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ जाति को लेकर खुला सवाल भी गृह मंत्रालय की ओर से जनगणना के लिए तय किए गए 40 सवालों में शामिल है. जनगणना अधिकारियों को लोगों के जवाब के आधार पर जाति की जानकारी दर्ज करनी होगी और इसमें कोई ड्रॉपडाउन या टिक मार्क वाला विकल्प नहीं होगा.
अगले महीने लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में शुरू होने वाली यह प्रक्रिया 1931 के बाद पहली बार आबादी की जाति दर्ज करने वाली जनगणना होगी. देश के बाकी हिस्सों में जनगणना का दूसरा चरण, जिसमें आबादी की गिनती की जाएगी, अगले साल फरवरी में शुरू होगा.
जाति से जुड़े सवाल के अलावा पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और कोविड-19 वैक्सीनेशन जैसे कई अहम सवालों की जानकारी भी जमीन पर काम कर रहे जनगणना अधिकारी दर्ज करेंगे. भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से जारी MHA के नोटिफिकेशन में यह जानकारी दी गई है.
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि जनगणना अधिकारी अपने क्षेत्र के लोगों से उनकी डिजिटल साक्षरता, हासिल की गई शिक्षा के सबसे ऊंचे स्तर और उनकी पढ़ाई के विषय के बारे में भी पूछेंगे. शैक्षणिक संस्थानों में उनकी उपस्थिति की स्थिति भी जनगणना अधिकारियों द्वारा पूछे जाने वाले सवालों में शामिल होगी.
रोजगार की स्थिति और काम करने के साधन भी गृह मंत्रालय की ओर से जनगणना अधिकारियों के लिए तय किए गए सवालों में शामिल हैं. इसके साथ ही उनके आखिरी निवास की जगह के बारे में भी पूछा जाएगा. इसके अलावा, जनगणना के दूसरे चरण के दौरान लोगों के पलायन की वजह भी जनगणना अधिकारी दर्ज करेंगे.
आबादी की गिनती औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले लोगों को घर-घर जाकर खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का मौका मिलेगा. यह काम जनगणना अधिकारियों के घरों पर पहुंचने से पहले किया जा सकेगा. MHA ने इस महीने की शुरुआत में जारी एक नोटिफिकेशन में कहा था कि खुद जानकारी दर्ज करने की यह प्रक्रिया 17 अगस्त से शुरू होगी और इस साल 31 अगस्त तक चलेगी.
इसी नोटिफिकेशन में गृह मंत्रालय ने बताया था कि जनगणना 2027 का पहला चरण, यानी घरों और आवासों की सूची बनाने का काम 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हो चुका है और 31 सितंबर तक पूरे देश में पूरा होने वाला है. जनगणना के पहले चरण में जनगणना अधिकारी किसी खास इलाके की सभी इमारतों, घरों और परिवारों की जानकारी दर्ज कर रहे हैं. इसके साथ ही घरों की स्थिति, सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जा रही है.
यह देश की कुल 16वीं और आजादी के बाद आठवीं जनगणना है. इस काम के लिए जमीन पर 30 लाख से ज्यादा जनगणना अधिकारी लगाए गए हैं. गृह मंत्रालय ने बताया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए कुल 11,718.24 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसमें से 4,102 करोड़ रुपये इस बड़े अभियान को चलाने के लिए पहले ही जारी किए जा चुके हैं.
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