लखनऊ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच अब एक आरोपी के खिलाफ संभावित बुलडोजर कार्रवाई तक पहुंच गई है. अधिकारियों का मानना है कि चोरी के पैसों से खरीदी गई संपत्तियों की जांच की जा रही है.
अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने गुरुवार को आरोपी लवकुश मिश्रा की पत्नी के नाम पर दर्ज एक निर्माणाधीन इमारत को लेकर नोटिस जारी किया. प्राधिकरण ने परिवार से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है और चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो इमारत को गिरा दिया जाएगा.
लवकुश मिश्रा उन आठ लोगों में शामिल है जिन्हें मंदिर के दान के पैसे के कथित गबन के मामले में गिरफ्तार किया गया है. इससे पहले जांच के दौरान पुलिस ने उसके घर पर छापेमारी कर 14.25 लाख रुपये नकद बरामद किए थे. उसे राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा का करीबी माना जाता था.
अयोध्या पुलिस के सूत्रों के अनुसार, मिश्रा शाहादतगंज इलाके में 1,000 वर्ग फुट के प्लॉट पर एक आलीशान बहुमंजिला मकान बनवा रहा था. यह ज़मीन अक्टूबर 2025 में उसकी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदी गई थी, जिसकी कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई गई. इस पूरे प्रोजेक्ट में लगभग 1.5 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है. वहीं, मिश्रा की मासिक सैलरी करीब 20 हज़ार रुपये बताई गई है.
मिश्रा की गिरफ्तारी से पहले यह इमारत लगभग बनकर तैयार हो चुकी थी, लेकिन गिरफ्तारी के बाद निर्माण कार्य रुक गया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तीन मंजिला इस मकान पर करीब 80 से 90 लाख रुपये खर्च किए जा चुके थे. इसमें बड़े किचन, कई बेडरूम, लिफ्ट के लिए जगह और एक अतिरिक्त मंजिल बनाने की भी व्यवस्था की गई थी.
जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या इस संपत्ति को मंदिर के दान से कथित तौर पर चोरी किए गए पैसों से बनाया गया था.
अब तक पुलिस ने आठों आरोपियों के यहां एक साथ की गई छापेमारी में 80.92 लाख रुपये से ज्यादा भारतीय नकदी, 1,121 अमेरिकी डॉलर और राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए बताए जा रहे सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए हैं.
पुलिस के मुताबिक, मनीष यादव के पास से 2 लाख रुपये, करुणेश पांडे के पास से 18.07 लाख रुपये, लवकुश मिश्रा के पास से 14.25 लाख रुपये, अनुकल्प मिश्रा के पास से 16.82 लाख रुपये, रामाशंकर के पास से 7.32 लाख रुपये, अविनाश शुक्ल के पास से 20.39 लाख रुपये और टिन्नू यादव के पास से 1 लाख रुपये नकद बरामद किए गए.
जांचकर्ताओं का मानना है कि लवकुश मिश्रा और उसके रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा ने कथित चोरी में सबसे बड़ी भूमिका निभाई और अयोध्या जिले के आसपास कम से कम आधा दर्जन संपत्तियां खरीदीं.
महाकुंभ के दौरान हुई सबसे ज्यादा चोरी
एसआईटी के सूत्रों के अनुसार, कथित चोरी का सबसे बड़ा हिस्सा 2025 के प्रयागराज महाकुंभ के दौरान हुआ, जब राम मंदिर में दान की राशि में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई थी. पुलिस को शक है कि 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 के बीच दान में आई इस बढ़ोतरी का फायदा एक संगठित गिरोह ने उठाया. जांच में कुछ बैंक कर्मचारियों की संभावित भूमिका के संकेत भी मिले हैं और पैसों के लेनदेन की कड़ी की भी जांच की जा रही है.
इस बीच, गुरुवार को तलाशी के दौरान जांचकर्ताओं को कथित रूप से चंदा जुटाने का एक और मामला मिला. अयोध्या के श्याम साधनालय योग केंद्र में ‘राम राज्य कोष’ नाम की एक दान पेटी मिली, जहां आरोपी अविनाश शुक्ल के रहने का आरोप है.
पुलिस को शक है कि शुक्ल ने ‘राम राज्य प्रशासन’ नाम का एक संगठन बनाया था और अयोध्या के कई स्थानों पर डिजिटल भुगतान के लिए QR कोड वाली दान पेटियां रखवाई थीं. बताया जा रहा है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद इनमें से ज्यादातर दान पेटियां हटा दी गईं, लेकिन योग केंद्र में एक दान पेटी अभी भी मौजूद थी.
योग केंद्र के कर्मचारियों ने जांचकर्ताओं को बताया कि शुक्ल ने जून की शुरुआत में वहां यह दान पेटी रखी थी और उसे हमेशा बंद रखता था. गुरुवार को पुलिस शुक्ल को मौके पर लेकर पहुंची और दान पेटी से नकदी बरामद की. कर्मचारियों ने यह भी दावा किया कि दान चोरी के आरोप सामने आने के बाद उन्होंने शुक्ल से योग केंद्र खाली करने के लिए कहा था.
पुलिस ने जांच का दायरा अयोध्या से बाहर भी बढ़ा दिया है. पुलिस सूत्रों ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से बताया कि 30 जून को प्रतापगढ़ में शुक्ल के पैतृक घर पर छापेमारी की गई. वहां जांचकर्ताओं को पता चला कि वह अपने माता-पिता के घर के पास एक नया मकान बनवा रहा था. अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि क्या इस संपत्ति का संबंध दान चोरी से मिले कथित पैसों से है.
अयोध्या में उत्तर प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि जांच एजेंसियां एक अन्य आरोपी टिन्नू यादव की संपत्तियों का भी पता लगा रही हैं. टिन्नू यादव को राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का करीबी माना जाता है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ता चल रही जांच के तहत उससे जुड़ी बताई जा रही संपत्तियों की भी जांच कर रहे हैं.
इस बीच, एसआईटी पहले ही इस मामले में चंपत राय से पूछताछ और जांच कर चुकी है. टीम के सूत्रों के अनुसार, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका की भी जांच किए जाने की संभावना है.
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