चंडीगढ़: अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर गोली चलाने की कोशिश की घटना के कुछ दिनों बाद, अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा ने सलमान खान से राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित मुकाम जाने और 28 साल पहले काले हिरण की हत्या के लिए माफी मांगने को कहा है. मुकाम बिश्नोई समुदाय का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है.
महासभा के अध्यक्ष देवेंद्र बुढ़िया ने बुधवार को जारी एक बयान में यह बात कही. इससे पहले मंगलवार को महासभा के पदाधिकारियों की बैठक हुई थी.
दिप्रिंट से फोन पर बात करते हुए महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र बुढ़िया ने कहा कि अगर अभिनेता ऐसा करते हैं, तो समुदाय उन्हें माफ करने पर विचार करने के लिए तैयार है.
बुढ़िया ने कहा, “अभी भी समय है. सलमान खान मुकाम जाकर माफी मांग सकते हैं. अगर वह ऐसा करते हैं, तो जीवन की रक्षा करने की हमारी धार्मिक मान्यता को ध्यान में रखते हुए समुदाय उन्हें माफ करने के बारे में सोच सकता है. गोली चलाने जैसी हिंसा गलत है. दोनों पक्षों से गलतियां हुई हैं. अगर अभिनेता ने अपना घमंड छोड़ दिया होता, तो यह विवाद टाला जा सकता था”.
उनका यह बयान श्रॉफ पर गोली चलाए जाने की घटना के कुछ दिनों बाद आया है. इस घटना ने बिश्नोई गैंग और बॉलीवुड अभिनेता के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद की चर्चा फिर से शुरू कर दी है.
मुकाम धार्मिक स्थल
मुकाम राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा तहसील में स्थित एक छोटा सा गांव है. बिश्नोई समुदाय के लिए इसका महत्व वही है, जो सिखों के लिए अमृतसर या कई हिंदुओं के लिए हरिद्वार का है.
यहां गुरु जंभेश्वर की समाधि है, जिन्हें जांभोजी भी कहा जाता है. वह 15वीं सदी के संत थे और उन्होंने बिश्नोई समुदाय की स्थापना की थी. उनकी समाधि के ऊपर एक मंदिर बना हुआ है. राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश के बिश्नोई परिवार पूरे साल यहां आते रहते हैं.
गुरु जंभेश्वर का जन्म 1451 में नागौर के पीपासर गांव में हुआ था. समुदाय की मान्यता के अनुसार, बचपन में वह मवेशी चराते थे और बहुत कम बोलते थे.
1485 में मारवाड़ में भयंकर अकाल पड़ने के बाद उन्होंने मुकाम के पास रेत के एक टीले, समराथल धोरा में बिश्नोई पंथ की स्थापना की. उन्होंने अपने अनुयायियों को 29 नियम दिए. बिश्नोई नाम इन्हीं नियमों से जुड़ा है. स्थानीय भाषा में ‘बीस’ का मतलब 20 और ‘नौ’ का मतलब 9 होता है.
इन नियमों के अनुसार, अनुयायियों को सभी जीवों के प्रति दयालु होना चाहिए, हरे पेड़ नहीं काटने चाहिए, मांस, शराब और तंबाकू से दूर रहना चाहिए और साफ-सुथरा व सादा जीवन जीना चाहिए.
1536 में उनकी मृत्यु हो गई और उन्हें मुकाम में समाधि दी गई. उनके अनुयायी इस जगह को मुक्ति धाम कहते हैं. उनका मानना है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना सुनी जाती है.
साल में दो बार, फाल्गुन और अश्विन महीनों की अमावस्या पर, लाखों बिश्नोई बड़े मेलों में शामिल होने के लिए मुकाम पहुंचते हैं. वे पूजा करते हैं, हवन में हिस्सा लेते हैं और 29 नियमों का पालन करने का संकल्प दोहराते हैं.
इसी वजह से समुदाय के नेता चाहते हैं कि माफी किसी अदालत या टीवी स्क्रीन पर नहीं, बल्कि मुकाम में मांगी जाए. एक बिश्नोई के लिए गुरु की समाधि पर मांगी गई माफी का धार्मिक महत्व होता है, जो किसी दूसरी जगह पर नहीं मिल सकता.
बिश्नोई समुदाय और काला हिरण
जानवरों और पेड़ों की रक्षा करना बिश्नोई समुदाय की धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा है.
1730 में जोधपुर के पास खेजड़ली गांव में 363 बिश्नोइयों ने कथित तौर पर जोधपुर के शासक के सैनिकों को खेजड़ी के पेड़ काटने से रोकने के लिए अपनी जान दे दी थी. गांव वालों का नेतृत्व करने वाली अमृता देवी का बलिदान आज भी हर बिश्नोई परिवार में सिखाया जाता है.
राजस्थान और हरियाणा के बिश्नोई गांवों में हिरण घरों और खेतों के बीच खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं. काले हिरण को परिवार के सदस्य की तरह माना जाता है. समुदाय की महिलाओं द्वारा अनाथ हिरण के बच्चों को अपना दूध पिलाकर पालने के मामले भी सामने आए हैं.
खान के खिलाफ शिकायत अक्टूबर 1998 से जुड़ी है. जोधपुर के पास फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान उन पर कांकाणी गांव में दो काले हिरणों का शिकार करने का आरोप लगा था. बिश्नोई समुदाय के गांव वालों ने इसे अपनी धार्मिक मान्यताओं पर हमला माना और मामला वन विभाग तक पहुंचाया.
अप्रैल 2018 में जोधपुर की एक अदालत ने इस मामले में अभिनेता को दोषी ठहराया और पांच साल की जेल की सजा सुनाई. जमानत मिलने से पहले उन्होंने दो रातें जेल में बिताईं. उनकी अपील अभी लंबित है. इस मामले में आरोपी दूसरे अभिनेताओं, जिनमें सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम शामिल थे, को बरी कर दिया गया था.
इसके बाद से यह मामला खतरनाक रूप ले चुका है. बिश्नोई समुदाय से संबंध रखने वाले गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह काले हिरण की हत्या का बदला लेना चाहता है. अप्रैल 2024 में उसके गैंग से जुड़े हमलावरों ने मुंबई में सलमान खान के घर पर गोलीबारी की थी.
बुढ़िया ने लॉरेंस का बचाव करते हुए कहा कि अभी तक उसके खिलाफ कोई अपराध साबित नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, “हमारे लिए वह एक हीरो है”.
लॉरेंस के चचेरे भाई रमेश बिश्नोई ने भी कहा है कि न तो समुदाय की और न ही लॉरेंस की अभिनेता से कोई निजी दुश्मनी है. उनके मुताबिक, यह सिर्फ धार्मिक भावनाएं आहत होने का मामला है. उन्होंने भी सलमान खान को गुरु जंभेश्वर की समाधि पर जाकर माफी मांगने की सलाह दी है.
कानून क्या कहता है
सुप्रीम कोर्ट की वकील सीमा सिंधु ने कहा कि माफी मांगने का कानूनी असर पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि माफी में क्या कहा गया है.
उन्होंने कहा, “अगर वह माफी मांगते हैं, तो यह इस बात पर निर्भर करेगा कि माफी में क्या लिखा या कहा गया है. बिश्नोई समुदाय की भावनाएं आहत करने के लिए सामान्य तौर पर मांगी गई माफी को स्वीकार्य सबूत नहीं माना जाएगा. लेकिन अगर वह कथित शिकार के लिए साफ तौर पर माफी मांगते हैं, तो अभियोजन पक्ष इसे संबंधित तथ्य की स्वीकारोक्ति के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है”.
सिंधु ने कहा कि अभिनेता के वकीलों को हर शब्द का बहुत ध्यान रखना होगा.
उन्होंने कहा, “अदालत के बाहर की गई स्वीकारोक्ति का इस्तेमाल उस व्यक्ति के खिलाफ किया जा सकता है, जिसने वह बात कही है. अगर वह कहते हैं कि उन्हें काले हिरण को मारने का अफसोस है, तो अभियोजन पक्ष इस बयान को अपीलीय अदालत के सामने रख सकता है. लेकिन अगर वह सिर्फ इतना कहते हैं कि उन्हें लोगों की भावनाएं आहत होने का अफसोस है, तो इससे वह खुद उस काम को करने की बात स्वीकार नहीं करते”.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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