नई दिल्ली: कनाडा के ग्रेटर टोरंटो इलाके में महंगी गाड़ियों को लूटने के मामले की जांच में जिन 10 लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनमें भारतीय मूल के छह लोग शामिल हैं. पील रीजनल पुलिस ने ‘प्रोजेक्ट हाई गार्ड’ के तहत 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, उन पर कुल 128 आरोप लगाए हैं और करीब 14 लाख डॉलर कीमत की चोरी की गाड़ियां बरामद की हैं.
पुलिस ने हथियार, बंदूकें, नशीले पदार्थ और अन्य सबूत भी जब्त किए हैं.
इस जांच में ग्रेटर टोरंटो इलाके में गाड़ियों को लूटने और महंगी गाड़ियां चोरी करने की कई घटनाओं पर ध्यान दिया गया. इनमें जून 2025 से अप्रैल 2026 के बीच गाड़ियां चोरी होने की 21 घटनाएं खास तौर पर शामिल थीं.
पील पुलिस ने कहा, “कुछ मामलों में चाकू और बंदूकें दिखाई गईं और पीड़ितों पर शारीरिक हमला किया गया. कुछ मामलों में पीड़ितों को गंभीर चोटें आईं.”
पुलिस ने आगे कहा कि जांच के दौरान अधिकारी “सिर्फ लूट की घटनाओं को अंजाम देने वाले लोगों तक ही नहीं पहुंचे, बल्कि उन्होंने एक ऐसे संगठित आपराधिक गिरोह का भी पता लगाया, जिस पर इन अपराधों की योजना बनाने, उन्हें अंजाम देने वालों को निर्देश देने और उनसे फायदा कमाने का आरोप है.”
पुलिस के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने उन लोगों की पहचान की, जो “गाड़ियों को निशाना बनाने, लूट की योजना बनाने और कम उम्र के लोगों को इन अपराधों में शामिल करने” के लिए जिम्मेदार थे.
पील पुलिस ने ब्रैम्पटन के शान ढींडसा (20), आर्यन देओल (20), मानवजॉय धालीवाल (24) और मधुमीत रंधावा (37) के खिलाफ आरोप लगाए हैं. इसके अलावा ओकविल के पार्थ शर्मा (21), मिसिसॉगा के ग्रेगरी सेनिव (37), और हाल्टन हिल्स के टेवियन कोली (19) और एकमवीर रंधावा (20) पर भी आरोप लगाए गए हैं. ब्रैम्पटन और मिसिसॉगा के 17 साल के दो लोगों पर भी इस जांच के तहत आरोप लगाए गए हैं. पील पुलिस ने 3 सितंबर को कई जगहों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाने के बाद इन लोगों को गिरफ्तार किया और उन पर आरोप लगाए.
प्रोजेक्ट हाई गार्ड
पील पुलिस ने एक बयान में कहा कि जांचकर्ताओं ने “करीब 14 लाख डॉलर कीमत की चोरी की 15 गाड़ियां बरामद कीं और चार अवैध बंदूकें, उनके कारतूस और मैगजीन जब्त कीं.” इन लोगों पर गाड़ियां चोरी होने की 21 घटनाओं के संबंध में कुल 128 आरोप लगाए गए हैं.
पुलिस विभाग ने कहा, “2023 में सबसे ज्यादा मामले सामने आने के बाद से पील इलाके में गाड़ियां चोरी होने की घटनाओं में 50 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है. 2026 में अब तक इन मामलों में 10 प्रतिशत की और कमी आई है. हालांकि, यह प्रगति उत्साहजनक है.”
पील पुलिस प्रमुख निशान दुरैयप्पा ने कहा, “प्रोजेक्ट हाई गार्ड के तहत हमारे जांचकर्ताओं ने इस गिरोह की पूरी कड़ी का पता लगाया. उन्होंने न सिर्फ उन लोगों की पहचान की, जिन्होंने इन लूट की घटनाओं को अंजाम दिया, बल्कि उन लोगों का भी पता लगाया, जिन पर इन घटनाओं के निर्देश देने और उनसे फायदा उठाने का आरोप है.”
ओंटारियो के सॉलिसिटर जनरल माइकल एस. केर्जनर ने कहा कि संगठित अपराधी, जो “हिंसक तरीके से गाड़ियां लूटकर और वाहन चोरी करके समुदायों में डर फैलाते हैं, उनके लिए ओंटारियो की सड़कों पर कोई जगह नहीं है.”
उन्होंने आगे कहा, “हमारी सरकार को प्रोजेक्ट हाई गार्ड जैसी जांच में क्रिमिनल इंटेलिजेंस सर्विस ओंटारियो के जरिए मदद करने पर गर्व है. इससे पुलिस को अपराधियों का पता लगाने, आपराधिक गिरोहों को खत्म करने और जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए जरूरी संसाधन मिलते हैं.”
प्रोजेक्ट हाई गार्ड के तहत पील रीजनल पुलिस ने चोरी की गाड़ियां बरामद कीं.
एक मामले का जिक्र करते हुए पील पुलिस ने बताया कि एक पीड़ित “एक सामुदायिक केंद्र में पुरुषों की हॉकी लीग से निकला था और घर जाते समय उसकी गाड़ी लूट ली गई. इस घटना में हिंसा इतनी ज्यादा थी कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.”
पील पुलिस के उप प्रमुख निक मिलिनोविच ने कहा, “हमारा आरोप है कि यह गिरोह ऐसी गाड़ियों की पहचान करता था, जिन्हें चोरी करके आपराधिक बाजार में बेचा जा सके. इस गिरोह ने एक गाड़ी को मॉन्ट्रियल बंदरगाह से भी बरामद किया था, जिसे देश से बाहर भेजा जाना था.”
पील पुलिस के सेंट्रल रॉबरी ब्यूरो के जासूस सार्जेंट अर्ल स्कॉट ने कहा, “आठ महीने तक अलग-अलग तरीकों से जांच करने के बाद कई लोगों की पहचान की गई, जो इस आपराधिक गिरोह का हिस्सा थे. इस गिरोह में अलग-अलग लोगों की अलग-अलग भूमिकाएं थीं. इनमें अपराधों की योजना बनाना, उन्हें आयोजित करना और अंजाम देना शामिल था.”
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए कुछ लोग गाड़ियों को निशाना बनाते थे, “कुछ अपराधों के बीच तालमेल बनाते थे, कुछ लूट की घटनाओं को अंजाम देते थे, कुछ कम उम्र के लोगों को इन अपराधों में शामिल होने के लिए भर्ती करते थे और कुछ चोरी की गाड़ियों को बेचने का इंतजाम करते थे.”
मंगलवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पील पुलिस ने एक वीडियो दिखाया. यह वीडियो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोत से लिया गया था और इसमें पिछली गर्मियों में ब्रैम्पटन में हुई गाड़ी लूटने की एक घटना दिखाई गई थी. पुलिस ने बताया कि वीडियो में एक रोल्स-रॉयस के चालक से जुड़ी लूट की घटना दर्ज है.
पुलिस ने एक बयान में कहा, “वीडियो में पीड़ित को एक कारोबारी प्रतिष्ठान के बाहर घेर लिया गया. वह अपने रोजमर्रा के काम कर रहा था. इसके बाद आरोपियों ने उसकी गाड़ी पर कब्जा करने के लिए उस पर शारीरिक हमला किया.”
पुलिस ने आगे कहा, “इस हमले में पीड़ित को शारीरिक चोटें आईं. यह वीडियो दिखाता है कि इन अपराधों में कितनी हिंसा का इस्तेमाल किया गया, पीड़ितों को किस तरह के खतरे का सामना करना पड़ा और ऐसी घटनाएं कितनी जल्दी हो सकती हैं और गंभीर रूप ले सकती हैं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)