नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टेज़ होटल में लगी भीषण आग के मामले में साकेत कोर्ट ने गुरुवार को होटल के सह-मालिक लवकेश बजाज को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई थी.
दिल्ली पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार किए गए लवकेश बजाज को साकेत कोर्ट परिसर में जज भानु प्रताप सिंह की अदालत में पेश किया. अदालत ने मामले की आगे की जांच के लिए पुलिस को चार दिन की कस्टडी मंजूर कर दी.
राष्ट्रीय राजधानी में हाल के वर्षों की सबसे भयावह अग्नि त्रासदियों में शामिल इस मामले में पुलिस ने बजाज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इनमें गैर-इरादतन हत्या (धारा 105), आग लगाकर नुकसान पहुंचाना (धारा 326(जी)), बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाना (धारा 324(5)), दूसरों के जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालना (धारा 125) और आग से संबंधित लापरवाही (धारा 287) शामिल हैं.
बुधवार तड़के दक्षिण दिल्ली के घनी आबादी वाले मालवीय नगर इलाके में स्थित एक बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) प्रतिष्ठान में भीषण आग लग गई थी. इस हादसे में 12 विदेशी नागरिकों समेत कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए.
जांच के दौरान अधिकारियों को इमारत की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां और नियमों के उल्लंघन मिले हैं.
सूत्रों के मुताबिक, इमारत की खिड़कियां और कांच के पैनल पूरी तरह बंद थे, जिससे धुआं बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था. जांच में यह भी पता चला कि बेसमेंट का प्रवेश द्वार अंदर से बंद था. बचाव दल को बेसमेंट तक पहुंचने में करीब 10 मिनट लगे, जहां से बाद में छह से सात लोगों को बाहर निकाला गया.
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचावकर्मियों को बेसमेंट के रास्ते में करीब ढाई फुट ऊंची लोहे की जाली भी मिली. इसे काटने में भी लगभग 10 मिनट लगे, जिसके बाद निकासी का काम आगे बढ़ सका.
जांच में यह भी सामने आया है कि इमारत में पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं थी और कोई आपातकालीन निकास द्वार (इमरजेंसी एग्जिट) भी मौजूद नहीं था. सूत्रों के अनुसार, इन कमियों के कारण धुआं तेजी से पूरी इमारत में फैल गया, जिससे लोग अंदर फंस गए और उन्हें बाहर निकालने में भारी दिक्कत हुई.
जांच एजेंसियों ने गेस्टहाउस की संरचना में भी कई खामियां पाई हैं. अधिकारियों के अनुसार, खिड़कियों के शीशे पूरी तरह बंद थे, जिससे आग लगने की स्थिति में मेहमानों के पास बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं था.
इसके अलावा, सभी कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था. सीढ़ियों के रास्ते में कांच के पैनल, निर्माण सामग्री और लकड़ी के ढांचे रखे हुए थे, जिससे आग के दौरान लोगों की आवाजाही और निकासी में बाधा उत्पन्न हुई.
मामले की जांच जारी है.
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