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Sunday, 17 May, 2026
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एएसआई ने हिंदुओं को भोजशाला में बिना रोक-टोक जाने की इजाज़त दी

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धार (मध्यप्रदेश), 16 मई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार जिले स्थित भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर करार दिए जाने के एक दिन बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने शनिवार को हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना और अन्य गतिविधियों के लिए स्मारक में निर्बाध प्रवेश की अनुमति दे दी।

एएसआई के आदेश का हवाला देते हुए एक अधिकारी ने कहा कि भोजशाला संस्कृत भाषा, व्याकरण और साहित्य के अध्ययन एवं अनुसंधान का केंद्र होने के साथ-साथ एक मंदिर भी रही है।

उन्होंने कहा कि इस कारण हिंदू समुदाय को ‘‘माता सरस्वती की पूजा और अध्ययन की प्राचीन परंपरा’’ के तहत परिसर में निर्बाध प्रवेश की अनुमति दी गई है।

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने शुक्रवार को अपने फैसले में एएसआई के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया था, जिसके तहत हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा की अनुमति दी गई थी तथा मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी।

मामले के मुख्य याचिकाकर्ता संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के आशीष गोयल ने कहा, ‘‘नई व्यवस्था में एएसआई ने पहली बार इस ऐतिहासिक स्थल को ‘राजा भोज द्वारा स्थापित भोजशाला एवं संस्कृत पाठशाला’ के रूप में उल्लेखित किया है तथा पहले इस्तेमाल किए जाने वाले ‘कमाल मौला मस्जिद’ शब्द का उपयोग नहीं किया है।’’

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से यह घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गोयल ने कहा कि एएसआई का आदेश लंबे समय से चले आ रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में भोजशाला के ऐतिहासिक स्वरूप और वहां हिंदू पूजा परंपरा की निरंतरता पर विशेष जोर दिया है, जिसके चलते एएसआई के नए आदेश में हिंदुओं को साल के 365 दिन पूजा करने का अधिकार दिया गया है।

ग्यारहवीं शताब्दी के इस स्मारक की धार्मिक प्रकृति को लेकर विवाद उस समय उत्पन्न हुआ था जब मुस्लिम पक्ष ने इसे कमाल मौला मस्जिद बताया, जबकि हिंदू पक्षकारों का कहना था कि यहां परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित मंदिर था जिसे अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान ध्वस्त कर दिया गया। मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की है।

इस बीच शनिवार को बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु ‘सरस्वती वंदना’ करने के लिए भोजशाला पहुंचे।

युवा श्रद्धालु गोकुल नागर ने कहा, ‘‘हमने वर्षों तक इस दिन को देखने के लिए संघर्ष किया है। हमें बेहद खुशी है कि अब हम प्रतिदिन भोजशाला में पूजा कर सकेंगे, जबकि पहले यह अवसर केवल मंगलवार को मिलता था।’’

एक अन्य श्रद्धालु संजय ने कहा कि वह माता सरस्वती का चित्र स्थापित करने के उद्देश्य से परिसर में लेकर पहुंचे थे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया और बताया कि इस संबंध में एएसआई के नियम अभी तय किए जाने बाकी हैं।

इंदौर ग्रामीण रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने कहा कि क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण है। उन्होंने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार में करीब 1,200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

भाषा दिमो राजकुमार

राजकुमार

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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